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“सभीं प्रारंभ विचारों से हीं होता है।”

एक प्रेरणादायी मंच, जहाँ अनमोल वचन, धार्मिक शंका समाधान, भारतीय संस्कृति और स्वदेशी विचारों पर संतुलित चिंतन-विचार मंथन।

 

““सफलता के लिए समय और धन का बुद्धिमानी से उपयोग करें, सकारात्मक सोच रखें, संकट में धैर्य बनाए रखें और निर्णय हमेशा शांतचित्त होकर लें।””चाणक्य 

“हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में प्रेरित करता है और उत्साह हीं कर्म को सफल बनता है।”ब्रह्मऋषि वल्मीकि जी

स्वदेशी उपयोग हीं देश को सहयोग

स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का अर्थ है कि भारत मजबूत होगा और हम सब मजबूत होंगे। जाने-अनजाने में भारत का प्रत्येक नागरिक एक-दूसरे के जीवन में कुछ न कुछ भागीदारी निभाता है। यदि हमारा देश मजबूत होगा, तो उसके बाद कुछ विदेशी सामान का उपयोग करने से भी विशेष अंतर नहीं पड़ेगा।

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चाणक्य और चंद्रगुप्त का संग- सफलता की अनिवार्य शर्त

हर कोई चाणक्य बनने की क्षमता नहीं रखता। क्योंकि।यदि हर कोई चाणक्य बन जाए, तो नेतृत्व कौन करेगा?यदि सभी नीति बनाएं, तो उस नीति को धरातल पर उतारे कौन?इसलिए, प्रकृति ने संतुलन का नियम बनाया — कोई चाणक्य बनता है, तो कोई चंद्रगुप्त।

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सुख का दुश्मन

लोग सुख की तलाश में तो जाते हैं, लेकिन यह भी भूल जाते हैं कि दुःख का न होना भी एक सुख है। इस दृष्टि से, जिसके जीवन में सुख और भोग के प्रति आकर्षण जितना कम होगा, उसके जीवन में सुख की स्थिरता उतनी अधिक होगी। इसे सरल भाषा में कहें तो कहा जा सकता है कि वह उतना अधिक सुखी होगा या उतनी अधिक देर तक सुखी रहेगा।

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अमृत छोड़ विष सेवन

दुःख का सिद्धांत कहता है—

“मैं आया हूँ, इसलिए परेशान मत हो। मैं स्थायी नहीं रहूँगा। मेरे रहने की एक निश्चित अवधि है। जैसे ही मेरा समय पूरा होगा, मैं यहाँ से चला जाऊँगा। तुम्हें मेरा दुःख इसलिए अधिक लग रहा है क्योंकि तुमने सुख का अनुभव किया है और यह सोच लिया था कि दुःख कभी नहीं आएगा। दुःख कहता है— यह भी सत्य है कि मेरे जाने के बाद सुख आएगा, और फिर एक समय पर मैं भी लौटकर आऊँगा।”

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गम का साथी

हस्तक्षेप से भरी हर राह का मोड़,

दिल की धड़कन अपनी ही राह बनाती है।

सुख में अनेक साथी मिलते हैं, पर दुःख में कोई नहीं मिलता।प्रकृति हर पल हस्तक्षेप करती रहती है।जीवन के प्रत्येक मोड़ पर अवरोध उत्पन्न होते हैं।फिर भी जीवन भर दिल यूँ ही धड़कता रहता है।कुछ भी हो, दिल अपना रास्ता स्वयं बना लेता है।

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वेद मंत्रसदेश

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

विश्व में भारत अपने उत्तम विचारों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहाँ के विचारों का आधार भारत की प्राचीन संस्कृति है, और यह संस्कृति वेदों पर आधारित है। वेदों का महामंत्र ‘गायत्री मंत्र’ है, जो वेदों के मूल आधार और सिद्धांतों को प्रस्तुत करता है।

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