August 2025

अजन्मा आत्मा

न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः |अजो नित्यः शाश्र्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे || २/२० || यहां भगवान  अपने विचार में स्पष्ट कहते हैं। “आत्मा के लिए किसी भी काल में न तो जन्म है न मृत्यु | वह न तो कभी जन्मा है, न जन्म लेता है और न जन्म

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सुख का दुश्मन

भोगैश्र्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम् |व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते ||२/ ४४ || अर्थात श्रीमद् भागवत गीता में भगवान कहते हैं – जो लोग इन्द्रियभोग तथा भौतिक ऐश्र्वर्य के प्रति अत्यधिक आसक्त होने से ऐसी वस्तुओं से मोहग्रस्त हो जाते हैं, उनके मनों में भगवान् के प्रति भक्ति का दृढ़ निश्चय नहीं होता। मनुष्य जन्म से हीं अपने

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ईश्वर का चिंतन-विचार

दिल में बसा ईश्वर का चिंतन कौन करै।जब मोह-माया से फुर्सत मिलै तब करै।। ईश्वर के चिंतक को निश्चित तौर पर मार्ग मिलता है। परंतु ईश्वर का चिंतक तो बनना पड़ेगा। जब ईश्वर से अटूट प्रेम होगा तब वह दिल में बस जाएगा। वास्तव में सबको सिर्फ आनंद चाहिए। वह जो सिर्फ आज का आनंद

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कर्म के द्वारा फल

देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत |तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि || २/३० || भगवान ने कितने सरल भाषा में अपने शब्दों को कहा है। वे अर्जुन से कहते हैं- “हे भारतवंशी! शरीर में रहने वाले (देही) का कभी भी वध नहीं किया जा सकता । अतः तुम्हें किसी भी जीव के लिए शोक करने की

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ईश्वर नाम चिंतन

उलटा नाम जपत जग जाना,बालमीकि भये ब्रह्म समाना।। श्री गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरितमानस में कहते हैं।”यह संपूर्ण जगत को पता है, उल्टा नाम जप कर भी वाल्मीकि जी ब्रह्म के समान हो गए।” वेदांत कहता है परम शक्ति ब्रह्म को किसी ने नहीं देखा। जिसने देखा वह शब्दों के जरिए व्यक्त नहीं कर सकता। वेदांत

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दुःख से भाग नहीं सकते

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः |अगामापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत || २/१४ || श्रीमद् भागवत गीता में सुख दुःख के ऊपर भगवान कितना सुंदर विचार रखते हैं। वे कहते हैं – हे कुन्तीपुत्र! सुख तथा दुख का क्षणिक उदय तथा कालक्रम में उनका अन्तर्धान होना सर्दी तथा गर्मी की ऋतुओं के आने जाने के समान है | हे भरतवंशी! वे

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माया और मन की माया

माया मुई न मन मुवा, मरि-मरि गया सरीर। कबीर जी महाराज अपने विचार प्रकट करते हुए कहते हैं – मनुष्य का न तो मन मरता है और न ही उसकी इच्छाएँ समाप्त होती हैं। केवल उसका शरीर नश्वर है और वही मरता है। जीव जब तक मन और माया के मोह में फंसा रहता है,

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कृपा करहिं सब कोई

जा पर कृपा राम की होई।ता पर कृपा करहिं सब कोई॥ तुलसी बाबा अपने विचार से ईश्वर की कृपा का सरल शब्दों में प्रस्तुति करते हैं। जिस जीव अथवा व्यक्ति पर परम शक्ति श्री राम की कृपा रहता है उस पर सभीं प्राकृतिक तत्व कृपा करते।  यह सब जानते हैं ,संसार की समस्त शक्तियां परम

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