August 2025

सभी धर्म को छोड़

अपने-अपने विचार से कुछ लोग श्रीमद् भागवत गीता के ऊपर प्रश्न उठते हैं। एक बहुत ही चर्चित श्लोक है “सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।” सभी धर्म का परित्याग करो और मेरी शरण में आ जाओ। इसका अर्थ वे बताते हैं “सभी धर्म को छोड़कर कृष्ण का धर्म मान लो।”  उस समय हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन इत्यादि कोई […]

सभी धर्म को छोड़ Read More »

संपूर्ण गीता सार

यत्र योगेश्र्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः |तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवो नीतिर्मतिर्मम || १८/७८ || यह श्लोक श्रीमद्भागवत गीता के अंत में संजय ने धृतराष्ट्र से कहा था। विचारणीय बात है इस श्लोक के पहले दिव्य दृष्टि युक्त श्री संजय संपूर्ण गीता का श्रवण कर चुके थे। वे संपूर्ण गीता सुनने के बाद कहते हैं ‘ हे

संपूर्ण गीता सार Read More »

दिल बेचैन

दिल कभी जिद करता है, कभी हँसता है, तो कभी रो देता है। उसकी बेचैनी भी वैसी ही होती है  मासूम, स्वाभाविक और अस्थायी। जैसे बच्चा खिलौना न मिलने पर रो देता है, वैसे ही दिल भी किसी अधूरे ख्वाब पर तड़प उठता है। अगर हम हर बार उसके पीछे भागते हैं, तो हम अपनी

दिल बेचैन Read More »

शांति के लिए ईश्वर

हरि अनंत हरि कथा अनंता।कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥ हरि अर्थात दुःख को हरने वाले ईश्वर! जिस प्रकार हरि के रूप अनन्त है उसी प्रकार हरि की कथा भी अनंत है। परम शक्ति ईश्वर के बारे में जो कुछ भी कहा जाए वह सब हरि कथा है। दुःखों का निवारण करने वाले भक्त अपनें भगवान

शांति के लिए ईश्वर Read More »

समय की पुकार

समय की भाषा समझना अत्यंत आवश्यक है। अभी नहीं समझोगे तो कब समझोगे। सभी के जीवन की अपनी एक कहानी है। समय के साथ जीना सीखो , समय के विपरीत जब व्यक्ति चलता है तब तूफान आता है। जब तूफान आता है तो व्यक्ति अस्त व्यस्त हो जाता है। इस बात को मानो, यदि नहीं

समय की पुकार Read More »

कहां दिल लगाए बैठे

कहां दिल लगाए बैठे हो, जहां दिल लगाए बैठे हो निश्चित तौर पर वह दिल तोड़ जाएगा। यकीन मानो एक न एक दिन तुम्हें छोड़ जाएगा। इसलिए हमारे महात्माओं ने कहा है ‘मंगल भवन अमंगल हारी’। तुम अपने ईश्वर जो मंगल का घर है,मंगल का महल है, जो समस्त अमंगलों को हरने वाला है। उस

कहां दिल लगाए बैठे Read More »

भक्त बनने का ढोंग

दुनिया में मशहूर हो , पूजा पाठ करने वाला व्यक्ति है। सही बात है होना भी चाहिए और करना भी चाहिए। तुम्हारा दिल जानता है तुम भगवान के लिए भगवान के पास कितनी बार जाते हो। अफसोस है तुम जितनी बार जाते हो उतनी बार संसारिक जरूरतों के लिए जाते हो। कौन सा व्रत और

भक्त बनने का ढोंग Read More »

दुःख के कारण

जीवन एक निरंतर परिवर्तनशील धारा है, जिसमें सुख और दुःख दोनों प्रवाहमान हैं। जैसे दिन के बाद रात आती है और वर्षा के बाद धूप खिलती है, वैसे ही जीवन में भी सुख के साथ दुःख का आना स्वाभाविक है। परंतु समस्या यह है कि मनुष्य सुख के क्षणों में इतना तल्लीन हो जाता है

दुःख के कारण Read More »

शिकायत किससे करते हो

मनुष्य स्वभाव से भावनाओं का जीव है। जब हम किसी से जुड़ते हैं, तो उसके स्वभाव, आदतें और उसके होने का तरीका हमें आकर्षित करता है। यही बातें हमें उसकी ओर खींचती हैं, हमें उसके करीब लाती हैं। लेकिन समय बीतने के साथ, वही बातें जो कभी हमें प्यारी लगती थीं, वही हमारी शिकायतों का

शिकायत किससे करते हो Read More »

माता को माता मत कहो

किसी को धरती को माता कहने में तकलीफ होता है। गंगा को गंगा माता कहने में तकलीफ होता है। प्रकृति को माता कहने में तकलीफ होता है। पंचतत्व से निर्मित यह प्रकृति अनेक जीव और वनस्पतियों का निर्माण करती है। एक दिन अंत समय में सभी निर्माण वनस्पति और जीव स्वत: पंचतत्व में विलीन हो

माता को माता मत कहो Read More »