September 2025

विचारों से कर्म और सफलता

अनुचित उचित काज कछु होई,समुझि करिय भल कह सब कोई। तुलसी बाबा कार्य में सफलता के लिए स्पष्ट कहते हैं: किसी भी कार्य का परिणाम उचित होगा या अनुचित, यह जानकर करना चाहिए, उसी को सभी लोग भला कहते हैं। जैसे कहा गया है धनुष से तीर निकालने के बाद वापस नहीं होता। जिह्वा से […]

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मन का माला फेर

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।कर का मन का डार दें, मन का मनका फेर ॥ श्री कबीर जी महाराज यहां कितनी सुंदर विचार प्रकट करते हैं। वे कहते हैं – “देखो माला फेरते हुए बरसों हो गए । परंतु अफसोस फिर भी मन का विचार नहीं बदला। हाथ का माल छोड़ दो ,

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उत्तम कर्म उत्तम कर्मफल

होइहि सोइ जो राम रचि राखा।को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ यहां श्री गोस्वामी तुलसी बाबा अपने विचार में रहते हैं : “जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा। तर्क करके कौन शाखा (विस्तार) बढ़ावे।” इस चौपाई के ऊपर अनेक लोगों का अनेकों प्रकार का मत है। परंतु यहां मेरा कहना है इसका क्या

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