October 2025

वेद पुराण PDF download

सनातन में सनातन साहित्य का बहुत विशाल भंडार है। एक समय था की वेद पुराण को सुनने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। उसके बाद जब वेद पुराण पर शोध होने लगे उसके बाद वेद पुराण का छपाई करण चालू हो गया। उसके बाद जो भी धर्म आस्था वाले व्यक्ति रहे उनके लिए शास्त्र […]

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जादू-टोना की वास्तविकता

यदि वास्तव में आत्माएं हमारा पीछा करती, तो आज पता नहीं, हर एक व्यक्ति के पीछे, कितनी आत्माएं पड़ी होतीं। अफसोस व्यक्ति अपने आप में चिंतन करें तो सब समझ सकता है। लेकिन भावनाओं का जाल ऐसा होता है, कि व्यक्ति स्वयं से स्वयं को चाह कर भी नहीं निकाल सकता। जादू टोना वास्तविकता में

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स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की ओर

भारतीय बाजार में भारतीयों की भागीदारी हो। भारत, एक विशाल जनसंख्या और विविध संसाधनों से परिपूर्ण देश, आज विश्व के तेजी से उभरते आर्थिक शक्तियों में से एक है। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि भारतीय बाजार में भारतीयों का बोलबाला हो। इसका अर्थ केवल स्थानीय उत्पादों का प्रयोग करना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की

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गंगा का उपकार

श्री गंगा जी की महिमा,मां गंगा! श्री गंगा जी के बारे में जितना भी कहा जाए कम होगा। भारतीय सनातन वेद संस्कृति में उपकार का महत्व बहुत बड़ा है। थोड़ा भी यदि कोई कुछ करें तो व्यक्ति उसे ईश्वर के सदृश्य मान लेता है। परमेश्वर को मानने की क्रिया इतनी प्रबल है, भक्त देव दानव

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साधकामृत – साधक संजीवनी

श्रीमद्भागवत गीता के ऊपर प्राचीन काल से शोध होते रहा है। श्रीमद्भागवत गीता प्रेमी अपने – अपने अनुसार से गीता जी को समझते रहे और संसार को समझाते रहे। साधक संजीवनी को समझने के लिए सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत गीता के बारे में समझना बहुत ही आवश्यक है। सनातन इतिहास में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा

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भ्रम और प्रार्थना

परमेश्वर भक्ति में अनेकों प्रकार के क्रियाएं कहा गया है। उन क्रियाओं में सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है परमेश्वर से प्रार्थना। प्रार्थना पर भ्रम के ऊपर चिंतन करें उससे पहले हम कुछ और चिंतन करें। आप एक सामान्य व्यक्ति हैं और कोई भी आपके पास आकर अपने प्रेम का इजहार करें। जब वह प्रेम का इजहार

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मां-बाप और आशा

बच्चे माता-पिता के उस बाग के फूल हैं, जिस बाग के सिवा माता-पिता  के पास और कुछ नहीं होता। बहुत ऐसे बच्चे हैं जो अपने माता-पिता के ऊपर ऐसे इल्जाम भी लगाते हैं, कि हम तो अपने मां बाप के रोमांस का फल है। यह कहने वाला निहायत ही महामूर्ख हो सकता है, क्योंकि पर्दे

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सनातन पर अंधविश्वास

सनातन धर्म में रोग कहते हुए सूनों तो अफसोस होता है। सनातन अपनें पद्धति तथा विचार में सर्व स्वीकार्य संस्कृति को लेकर सर्वोत्तम है। परधर्मि इस पद्धति को मान देते हो न देते हो,  इसमें कोई आश्चर्य नहीं, सब के अपने विचार हो सकते हैं। यदि हम अपने सनातन पद्धति में करीब से देखें तो

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रामप्रसाद जी महाराज रामसनेही

सनातन संस्कृति में आज भी कितने महान महामानव उपस्थित है इसका गणना नहीं हो सकता। परधर्मी विचारक अपनें को अच्छा बनाने के लिए सनातन धर्म का परिहास करते हैं और अपने अनुसार परधर्म की खूबियां गिनाते हैं। सनातन संस्कृति के महामानव खामोश! अपनें योग साधना में अथवा अपने कर्म में लीन रहते हैं। चुकी सनातन

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