October 2025

ईश्वर-मंदिर अंधविश्वास चिंतन

भगवान और मंदिर क्यों चाहिए? सनातन संस्कृति में भगवान और मंदिर का महत्व किसी से छिपा हुआ नहीं है। यह सवाल उठता है,कुछ प्रतिशत लोगों के अविश्वास से। एक सवाल अनेक महत्वपूर्ण सवाल को जन्म देता है, जिसे जानना प्रत्येक सनातन अनुयाई को अवश्य है। “क्या वाकई में भगवान है, और वह भी है! तो […]

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धर्म का भ्रम

मानव धर्म यह किसके लिए है? मानव धर्म वह धर्म नहीं जो हमें अपने धर्म समूह से मिला है। अपना धर्म समूह हमें अपने लिए धर्म सिखाता है परंतु मानव धर्म संपूर्ण समाज के लिए धर्म सिखाता है। वास्तव में कोई धर्म छोड़ना नहीं है। संसार में यदि धर्म की चर्चा की जाए तो सबसे

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राम-रामायण और भ्रम

राम-रामायण और चरित्र यह श्रीराम से अलग नहीं हो सकता। राम के रहने का जो मुख्य स्थान है, वह रामायण है। राम अनंत है और राम का चरित्र भी अनंत है। चर्चा चिंतन के बाद अनेंक प्रकार की संका समाज के अंदर उत्पन्न होता है और व्यक्ति अपने तरीके से उन शंकाओं का समाधान निकालने

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प्राकृतिक सिद्धांत का मूल – गीता

श्रीमद्भागवत गीता एक ऐसा ग्रंथ है, कि शायद ही कोई ऐसा हो जो इनके बारे में ना जानता हो। सनातन पद्धति के लिए अनेकों वेद पुराण ग्रंथ मौजूद है। सभी अपने आप में परिपूर्ण है, वास्तव में किसी से किसी की तुलना नहीं हो सकता, परंतु गीता जी के लिए कहा गया है की गीत

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पारिवारिक सुख-शांति

पारिवारिक सुख-शांति में  आपसी प्रेम बहुत बड़ा अपना रोल अदा करता है । जब परिवार धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है, जब परिवार के व्यक्ति एक उम्र से दूसरे उम्र में प्रवेश करते हैं तो धीरे-धीरे वे एक दूसरे से दूर होते चले जाते हैं। एक समय प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे के लिए जान देने

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विवाह की प्रथा

भारतीय संस्कृति में पहले सिर्फ एक हीं विवाह होता था। कहते हैं सात जन्मों का रिश्ता। आज के समय सात जन्मों का रिश्ता महज एक कहावत बनकर प्रचलित है। कल और आज में मानव जमीन आसमान का अंतर हो गया हो। पहले विवाह के बाद कसमें खाते थे, एक दूसरे का साथ निभाने के लिए

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योगेश सोलंकी – सादगी और संघर्ष का मिश्रण

“विशेष के बिना विशेषता व्यक्त करना नामुमकिन है। कहीं कुछ विशेष हो, तो उसे प्रकट करने में संकोच नहीं होना चाहिए।” यह पंक्तियाँ बिल्कुल उपयुक्त हैं, जब बात हो श्रीमान योगेश सोलंकी की- एक ऐसे व्यक्तित्व की, जो सामान्य दिखते हुए भी असाधारण सिद्धांत, समर्पण और सेवा-भाव से भरे हुए हैं। मानवता और जीवन का

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वास्तविक नायक – बोस

इतिहास छुपाने से नहीं छुपता। आजादी के बाद जितने भी सरकार में सम्मिलित महत्वपूर्ण समाज सेवक ‌व्यक्ति थे, सभीं को लगभग सरकार से धीरे धीरे पृथक कर दिया गया, या वैसे स्थिति उत्पन्न किया गया कि वे स्वत: दूर हो गए। कहा जाता है व्यक्ति का विश्वास जीवित रहता है। जिन्हें आजादी के बाद देश

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स्वदेशी मारूति और गुरुग्राम का विकास

स्वदेशी मारुति कार की कहानी केवल एक कंपनी की व्यावसायिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की स्वदेशी  तकनीकी, औद्योगिक और सामाजिक प्रगति की कहानी भी है। यह उस राष्ट्रीय आत्मबल, दूरदर्शिता, और सही साझेदारी का परिणाम है, जिसने भारत के हर कोने में कार को एक सपना नहीं, बल्कि एक सच्चाई बना दिया। शुरुआत

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