November 2025

सरल और विलक्षण संत – स्वामी रामसुखदास

स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज अपने आप में एक अत्यंत सरल, सादगीपूर्ण और विलक्षण संत थे। उनकी सरलता, सादगी और नि:स्वार्थता की तुलना पूरे संत समाज में किसी से नहीं की जा सकती। भारत के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा महान संत हुआ हो, जो इतने ऊँचे आध्यात्मिक स्थान पर होते हुए भी कभी […]

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मानवता

मानवता, एक ऐसा शब्द जो सुनते ही मन में करुणा, सहानुभूति, प्रेम और समझ का भाव जगाता है। किंतु प्रश्न यह उठता है कि क्या वास्तव में मानवता वही है, जो हम आज समझते हैं? या यह एक सतत प्रक्रिया है-एक ऐसी सीख, जो मानव को निरंतर अर्जित करनी पड़ती है? धरती के इतिहास की

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भक्त का तकलीफ

परमेश्वर एक माँ की तरह हैं। जिस प्रकार माँ अपने बच्चे से प्रेम करती है और उसके बदले में कुछ नहीं चाहती, उसी प्रकार परमेश्वर भी अपने भक्तों से निस्वार्थ प्रेम करते हैं। यद्यपि परमेश्वर सबके प्रति समान व्यवहार करते हैं, परंतु जो उनका अनन्य भक्त होता है, परमेश्वर उसके साथ माँ की तरह स्नेहपूर्ण

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भरोसे की पहचान

“सामाजिक दुश्मन एक बार के लिए पीछा छोड़ सकता है, परंतु अपना हीं भावना रूपी दुश्मन कभी पीछा नहीं छोड़ने वाला।” कोई हम से प्रेम कैसे करें? यदि विचार करें तो कोई भी व्यक्ति किसी को भी अपने को प्रेम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। नफरत और प्रेम दोनों ही एक सिक्के के

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तत्वदर्शी- गृहस्थ संत सुदर्शन सिंह

लेखक अपने विचारों के माध्यम से एक दार्शनिक तत्व को प्रकट करता है। मेरे लिए यह लेख अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज जो कुछ भी मैं लिखता हूं, अथवा मेरे विचारों में जो भी उत्तम शब्द हैं, उनमें से अधिकांश का श्रेय मेरे पूज्य, गृहस्थ संत तत्वदर्शी गुरु जी श्रीमान श्री सुदर्शन सिंह जी को

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प्रेम दर्शन – वास्तविक प्रेम चरित्र

“बिना हमारे समर्पण के हम सिर्फ सामने वाले के समर्पण का इच्छा करें, तो यह गलत होगा और ऐसे प्रेम के बदले  फ्रेम हीं मिलेगा ।” प्रेम का रंग और वास्तविक परिभाषा समझने के लिए भी प्रेम चाहिए। प्रेम वहां से शुरू होता है, जहां बुद्धि अपना कार्य छोड़ देता है। इसीलिए इतिहास में अनेक

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चाणक्य और चंद्रगुप्त का संग- सफलता की अनिवार्य शर्त

इतिहास केवल घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं होता; वह उन विचारों और संबंधों का आईना भी होता है, जिन्होंने सभ्यताओं की दिशा बदली। भारत के इतिहास में चाणक्य और चंद्रगुप्त का संबंध ऐसा ही एक अद्वितीय उदाहरण है — जहाँ बुद्धि और पराक्रम, नीति और कार्य, विचार और कर्म का संगम हुआ। हर व्यक्ति अपने भीतर

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दिल की कमान

काश दिल के अंदर दो दिल होता। टूटे हुए दिल के लिए क्या कहें, इस दुनिया में एक दिल ही तो है जो कहते हैं मानता नहीं! दिल को हर समय कुछ न कुछ चाहिए, दोस्तों से तो चाहिए साथ में दुश्मनों से भी चाहिए। एक मशहूर कहावत है ,टूटा हुआ दिल कहता है- काश!

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मानव का यात्रा

सपनें हीं आनंद देते हैं,पर सपनें ही दर्द भी दे जाते हैं,सपनें तो सपने होते हैं ,अधूरी प्यासकुछ पाने की आशा। एक बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से उस बच्चे के अंदर एक आशा का बनना शुरू हो जाता है,” आशा कौन सी आशा!” कुछ पाने की आशा कुछ बनने की आशा। एक

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