November 2025

वेद दर्शन

ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं……वेद-वेदांत दर्शन समुंद्र के जैसा विशाल है।  संस्कृत भारत दर्शन का प्राचीनतम भाषा है। संस्कृत आज समाज का मुख्य भाषा नहीं है, जिसके वजह से वेदों के शब्दों को आज की प्रचलित भाषा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। समाज में सनातन समाज के कल्याण के लिए एवं बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने […]

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नारी दर्शन- बहुमूल्य चिंतन

“एक नारी अपने लिए क्या खोजती है ? उसे अपनों से हौसला ,प्रेम  और सम्मान चाहिए। इतिहास गवाह है नारी ही हर जगह प्रेम बांटती आई है‌।” हर बार हर जगह सिर्फ औरत ही क्यों सुने? सामाजिक व्यवस्था में नारी का स्थान कहां है यह सभी को पता है। चर्चा तो बहुत होता है परंतु

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अद्भुत साधन- कर्म योग

भारतवर्ष में संत महात्मा का हमेशा से ही विशेष प्रभाव रहा है। यह वाणी-लेख ”संत एकादश सेवक महाराज” की है । मेरे विचार से यें एक उच्च कोटि के संत हैं और यदा-कदा मेरा उनसे मुलाकात भी होता है। मैंने बहुत संतो को देखा परंतु बिना लाग लपेट के सीधा बोलने वाला यह संत मुझे

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अमृत गीता- ज्ञान का मूल

महानुभाव! श्रीमद्भागवत गीता के बारे में कितना भी कुछ कहा जाए, कम होगा। राम को पसंद करने वाले राम की भक्ति करते हैं। कृष्ण को पसंद करने वाले कृष्ण की भक्ति करते हैं। शिव को प्रसन्न करने वाले शिव की भक्ति करते हैं।इसमें यह कहते हुए किसी प्रकार भी किसी को भी दुविधा नहीं होना

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वास्तविक विरासत

प्राचीन इतिहास से लेकर, आज तक भारत में अनेकों महामानव हुए । उन महामानव को लेकर देश हीं में अनेक पंथ और संप्रदाय हैं। चाहे वह किसी भी जाति धर्म से युक्त व्यक्ति हो, परंतु उनके उद्देश्य तथा क्रियाकलापों में हमेशा से ही सनातन की छवि रहा है। धरती पर अनेक देश है, जहां सिर्फ

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