December 2025

प्रेम की वास्तविकता

श्री कबीर दास जी को आज संसार में कौन नहीं जानता! संसार की वास्तविकताओं को अपने दोहों के माध्यम से सरलता से प्रस्तुत करने वाले कबीर दास जी भारत के अतुलनीय संतों में गिने जाते हैं। वे लंबे-चौड़े भाषणों की अपेक्षा संक्षेप में, दोहों के माध्यम से, गहनतम सत्य कह देने में विश्वास रखते थे।

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प्रेम का स्वरूप

प्रेम किसी घर में या अपनी जागीर में उपजने वाला तत्व नहीं है। यह कोई ऐसी वस्तु भी नहीं है जिसे बाज़ार में खरीदा या बेचा जा सके। प्रेम का स्वभाव स्वच्छ, स्वतंत्र और सार्वभौमिक होता है। यह न किसी सीमा में बंधता है और न किसी अधिकार से उत्पन्न होता है।दरअसल, प्रेम का जन्म

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प्रेम का लड्ड

जो खाए वह पछताए,जो न खाए वह भी पछताए। कहते हैं, “प्रेम का लड्डू जो खाए वह पछताए।” यह वाक्य जीवन की वास्तविकता को बयां करता है। इंसान की उम्र के साथ दुनिया को देखने का नजरिया लगातार बदलता रहता है। बचपन में दुनिया का रंग-रूप अलग होता है, जवानी में दृष्टि और बदल जाती

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सुख की खोज और जीवन

वास्तव में सुख कोई खाने की वस्तु नहीं है, न ही यह किसी बाजार में मिलने वाली चीज़ है। सुख तो मन का वह नर्म स्पर्श है, जिसे अनुभव तो किया जा सकता है, पर पकड़ा नहीं जा सकता। यह भावनाओं की तृप्ति से उत्पन्न होता है—कभी क्षणिक, कभी स्थायी, और कभी केवल एक भ्रम

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मृत्यु के क्षण में मन के दर्पण

मानव जीवन मृत्यु के बिंदु पर आकर एक अनोखे रहस्य से घिर जाता है। अनेक धर्मों और लोक-परंपराओं में यह माना जाता है कि मृत्यु के समय देवदूत या यमदूत प्रकट होते हैं और मनुष्य को उसकी अगली यात्रा की ओर ले जाते हैं। किंतु गहरे चिंतन से देखने पर यह बात स्पष्ट होती है

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सनातन संस्कृति : उद्देश्य, स्वरूप और सत्य की खोज

सनातन साहित्य की कथाओं में मतभेद होना स्वाभाविक है। अनेक लोग जीवन भर इन्हीं मतभेदों में उलझकर अपना समय नष्ट कर देते हैं, जबकि कम ही लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि कथा के पीछे छिपा उद्देश्य क्या है। प्राचीन काल में न तो पुस्तकालय थे, न छापाखाने। धर्मग्रंथ महात्माओं द्वारा हाथ से

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सनातन संस्कृति : एक प्राकृतिक दृष्टि

सनातन धर्म को समझने के लिए सर्वप्रथम इसके इतिहास, मूलभाव और दर्शन को जानना आवश्यक है। आज के कुछ इतिहासकारों के मन में यह भ्रम है कि सनातन धर्म किसी व्यक्ति द्वारा निर्मित कोई पंथ है, जबकि वास्तविकता यह है कि सनातन धर्म एक प्राचीनतम, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक संस्कृति है—जिसे समय के साथ अनेक परंपराओं,

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