दिल में ईश्वर के लिए जगह

जिनके कपट, दम्भ नहिं माया।
तिनके ह्रदय बसहु रघुराया॥

तुलसी बाबा कहते हैं जिनके अंदर पहले से कपट, दंभ और माया का निवास है उनके अंदर ईश्वर का वास नहीं होता। यदि हृदय में ईश्वर का वास कराना हो तो पहले इन सब तत्वों का त्याग आवश्यक है। घर में ईश्वर को बुलाने के लिए बहुत कार्य किए जाते हैं। परंतु हृदय में बसाने के लिए कुछ भी नहीं।

Dil mein Ishwar ke liye jagah

ईश्वर का वास केवल उसी हृदय में हो सकता है जो शुद्ध, सरल और निर्मल हो। यदि किसी के अंदर कपट (छल-प्रपंच), दंभ (अहंकार), और माया (भौतिक लालसा) भरी हो, तो वहाँ ईश्वर निवास नहीं कर सकते, क्योंकि ये सब गुण मनुष्य को आत्मकेंद्रित, स्वार्थी और असत्य की ओर ले जाते हैं।

हम लोग अक्सर घरों में ईश्वर को बुलाने के लिए पूजा-पाठ, यज्ञ, भजन आदि बहुत कुछ करते हैं -ये सब बाहरी प्रयास हैं। लेकिन यदि हमारा अंदर (मन और हृदय) शुद्ध नहीं है, तो ये सारे प्रयास केवल दिखावा बनकर रह जाते हैं।

इसके लिए जरूरी है कपट को त्यागें -सच्चाई और निष्कलंकता अपनाएं। दंभ को छोड़ें-विनम्रता और नम्रता को जगह दें।माया से ऊपर उठें ,भोग की लालसा को त्यागकर भक्ति में मन लगाएं

संपूर्ण क्रिया का सार यह है कि ईश्वर को बाहर नहीं, अपने भीतर बसाना है। और जब तक हृदय शुद्ध नहीं होगा, तब तक वह दिव्य उपस्थिति संभव नहीं।

 

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