किसी को धरती को माता कहने में तकलीफ होता है। गंगा को गंगा माता कहने में तकलीफ होता है। प्रकृति को माता कहने में तकलीफ होता है।
पंचतत्व से निर्मित यह प्रकृति अनेक जीव और वनस्पतियों का निर्माण करती है। एक दिन अंत समय में सभी निर्माण वनस्पति और जीव स्वत: पंचतत्व में विलीन हो जाते हैं। ज़मीन में बीज डालते हैं और बीज निकल कर पेड़ बन जाता है।
प्रकृति अपने वातावरण से जीव का निर्माण करती है। जीव जन्म लेता है हंसता है खेलता है कूदता है। धरती पर जीव का और वनस्पति का एकमात्र आधार प्रकृति है परंतु प्रकृति को माता मत कहो क्योंकि वैदिक परंपरा प्रकृति को माता मानता हैं।