कहां दिल लगाए बैठे हो, जहां दिल लगाए बैठे हो निश्चित तौर पर वह दिल तोड़ जाएगा। यकीन मानो एक न एक दिन तुम्हें छोड़ जाएगा।
इसलिए हमारे महात्माओं ने कहा है ‘मंगल भवन अमंगल हारी’। तुम अपने ईश्वर जो मंगल का घर है,मंगल का महल है, जो समस्त अमंगलों को हरने वाला है।
उस ईश्वर से दिल लगाओ, जिसका तुम्हारे पूर्वजों ने जाप किया है। निश्चय हीं तुम भी उससे दिल लगा कर मंगल के भवन में निवास करोगे।