ग़म का साथी

हस्तक्षेप से भरी, हर राह का मोड़,
दिल की धड़कन, अपनी हीं राह बनाती।

gam ka saathee


कहते हैं दुःख में अपना साया तक साथ छोड़ने लगता है। सुख में अनेंक साथी मिलते हैं पर दुःख में कोई नहीं। प्रकृति हर पल हस्तक्षेप करती है। जीवन के हर मोड़ पर अवरोध उत्पन्न होता है। फिर भी जीवन पर्यंत दिल यूं हीं धड़कते रहता है। कुछ भी करो दिल अपना रास्ता स्वयं बनाता है। हतास होने से कभी गम दूर नहीं होता। गम तो तुम्हें स्वयं से स्वयं का दूर करना होगा।

वेदांत कहता है
“अपनें गम का तुम हीं साथी हो और तुम ही मंजिल।
भावनाएं तुम्हारे बस में नहीं,
इसलिए दूसरे भी तुम्हें बेचैन कर जातें हैं।”

विचार करो कोशिश तुम्हें दूसरे के लिए नहीं अपने लिए करना है। तुम्हारी कोशिश कितनी शुद्ध है इसके ऊपर निर्भर करता है कि तुम कितना दूर तक जाओगे। हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए। बार-बार प्रयास करने से हम अपने लक्ष्य के पास और निकट आते हैं।

विश्लेषण करके हम अपने पिछले प्रयासों से सीखते हैं और अगले कदमों की योजना बनाते हैं, ताकि हम अधिक सफलता प्राप्त कर सकें। यह हमें मंजिल की दिशा में स्थिर रहने में मदद करता है और हमें हर कठिनाई का सामना करने की ताकत देता है।

खोने का गम ना करो क्योंकि कोई भी वस्तु सदैव नहीं रहने वाला है। फिर से वापस कोशिश करो निश्चित तौर पर वापस तुम उसे वस्तु को पा सकते हो

यह मत भूलो हर वस्तु का अपना समय होता है, लेकिन आप उसे खोने के गम में डूबने के बजाय उसे पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर सकते हैं। अपने विश्लेषण के साथ, आप अगले कदमों की योजना बना सकते हैं और पुनः सफलता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

जो नहीं मिला उसके लिए गम ना करो फिर से कोशिश करो निश्चित तौर पर तुम उसे पा सकोगे। किसी भी स्थिति में  हार नहीं माननी चाहिए। पुनः प्रयास करने से आपकी संभावनाएं बढ़ती हैं कि आप अपना लक्ष्य प्राप्त करें। विश्लेषण करें, पिछले प्रयासों से सीखें, और अपनी योजना को संशोधित करें, ताकि आप अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।

11 thoughts on “ग़म का साथी”

  1. यह विचार दिल को छू जाता है कि गम को दूर करने के लिए हमें खुद ही कदम उठाना पड़ता है और बार-बार प्रयास करते रहना चाहिए। वास्तव में, हर गम का समाधान हमारे अपने प्रयासों और शुद्ध इरादों में ही छिपा है।बहुत बढ़िया 👌

    1. पोस्ट को लाइक और अपना विचार प्रकट करने के लिए आपका विशेष आभार! धन्यवाद! 🙏

  2. Dear Ved
    Read below in new comment, my response on your post, a song :
    Reading your posts gives me a rare pleasure.
    Thanks for liking my post “Gandhi”. 🙏🌹💕❤️

    1. Dear Sir
      Thank you so much for your kind and heartfelt words. I’m truly glad my posts bring you joy — that means a lot to me. 😊
      Your post on “Gandhi” was inspiring and deeply thoughtful. . 🙏

        1. I’m sorry you were offended. All creations are art in their own right. The song was good. I felt it wasn’t particularly useful in the comments section. I could post an article on it. You’re so active, it’s inspiring to everyone. Special thanks for your like and comment! 🙏

  3. Dear Ved,
    Once we accept each other in this creative field of writing, we must shed worldly ordinary things like ego.. I was not offended at all. I just wanted to check whether you got the song or not! 😍🌹

    1. I said, “The songs were good.” What you said was absolutely correct! No, sir! Don’t think like that! In reality, ego harms oneself, not others. Artists are far removed from these things. They are emotional, but they don’t want to hurt others. Your dedication and creativity are exceptional. Thank you for your likes and replies!🙏

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *