वास्तविक विरासत

प्राचीन इतिहास से लेकर, आज तक भारत में अनेकों महामानव हुए । उन महामानव को लेकर देश हीं में अनेक पंथ और संप्रदाय हैं। चाहे वह किसी भी जाति धर्म से युक्त व्यक्ति हो, परंतु उनके उद्देश्य तथा क्रियाकलापों में हमेशा से ही सनातन की छवि रहा है।

वास्तविक विरासत

धरती पर अनेक देश है, जहां सिर्फ एक अथवा दो विचारधाराएं चला करती है। परंतु यह विशाल भारत है, यहां एक अथवा दो नहीं अनेकों को विचारधाराएं चला करती है। ऐसा नहीं है की इन विचारधाराओं में कोई एक अथवा दो अच्छे हैं, सभीं विचारधारा अपने आप में पूर्ण है। भारत के महामानव की बात करें तो व्यक्ति को पूर्णतया प्रकट करने में, शायद अनेक जन्म लग जाए।

हम महामानव विशेष पर चर्चा की आगे कोशिश करेंगे, ऐसा नहीं है कि दूसरे देशों का अपना कोई इतिहास नहीं रहा है। सबका अपना-अपना इतिहास होगा। हम तो हिंदुस्तान के हैं, उस हिंदुस्तान के जो कभी इस धरती पर खुशहाली और मजबूत अर्थव्यवस्था का केंद्र था। जिसे लेकर अनेकों देशों ने, तथा अनेक आक्रांताओं ने आकर्षित होकर देश पर हमला किया, तथा अनेंक  सालों तक शासन किया, और अपनी मर्जी से अपनी विचारधारा हीं थोपते रहे और देश को लूटते रहे।

सब होने के बाद भी भारतीय महामानवों की हीं देन है, कि आज भी भारत अपने विचारों के लिए, अपने विभिन्नताओं के लिए धरती पर सर्वश्रेष्ठ देश में जाना जाता है। व्यक्ति के विचार स्वतंत्र होते हैं जिसे कोई बदल नहीं सकते, न व्यक्ति ! स्वयं को बदलना चाहता है। हम भारतीय महामानव के जरिए, प्राचीन भारत की विचारों की चिंतन करेंगे। उन विचारों का चिंतन करेंगे, जो विचार आज भारतीय परंपरा का मानव रीढ़ का हड्डी हो। जिस विचार के बिना हम भारत की कल्पना नहीं कर सकते।

कोई माने अथवा न माने हर एक भारतीय को उन विचारों को संजोना होगा, जिन विचारों को लेकर उनके पूर्वजों ने, समृद्ध भारत को बसाया था, जो भारत को खास ही नहीं खासम खास बनाया। सदा जय हो उन भारत के महामानव, जिनका स्वार्थ सिर्फ अपने तक सीमित नहीं था, जिन्होंने देश को हीं अपना घर माना, देश के हर व्यक्ति को अपना जाना।जिन्होंने अपने हर एक सोच से भारत के इतिहास को सींचा।

इतिहास के सभीं मानव के शब्द इस विशाल भारत का प्रमुख विरासत है। भारत के महामानव इसलिए भी खास है कि वह कभी दूसरे देशों पर जाकर हुकूमत नहीं किए। दूसरे देशों में जाकर गंध नहीं फैलाया। भारत के महामानव वह थे जिन्होंने सभीं को महामानव बनाने का प्रयास किया।

भारत के महा मानव की कीर्ति बदला नहीं जा सकता। भारत के महामानव की सुगंध आज भारत के संस्कृति के कोने-कोने में मौजूद है। हर भारतवासी को अपने महामानव के ऊपर गर्व होना चाहिए। भारतीय महामानव की वाणीं ही सनातन साहित्य है। अतुल्य भारत का असली विरासत।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *