सबसे पहले तो यह विचार करें कि हमारी स्वयं की भावना हमारे ज्ञान के अनुरूप चलता है अथवा विपरीत चलता है। क्योंकि आपकी भावनाएं कहां तक और किस तरफ जाती है वह आपके सिवा और कोई नहीं जानता। आप किसी भी डॉक्टर आथवा गुरु किसी के पास भी चले जाओ आपके विपरीत भावनाओं का इलाज सिर्फ आपके पास है। यह आत्मा और शरीर के बीच रहने वाला बहुत बड़ा अदृश्य शक्ति है।
भावनाओं के महत्व को भी समझना पड़ेगा। भावनाओं के अंतर्गत ही दोस्त दुश्मन रिश्तेदार अपने और पराए होते हैं। भावनाओं के अंतर्गत ही इन सभी करीबियों को लोग महत्व देता है। अपने भावनाओं के अनुरूप है किसी को कम अथवा किसी को ज्यादा महत्व देता है। परंतु बहुत बार ऐसा देखने में आया है कि जिसे हमें महत्व नहीं देना चाहिए हम भावनाओं में भाकर उसे भी महत्व दे जाते हैं।
कहते हैं इस धरती पर मानव के अंदर भावनाएं सबसे बड़ा तत्व है। वेदांत कहता है भावना विहीन व्यक्ति पशु के समान है। परंतु यहां देखने वाली बात है यदि भावना के जगह पर कुभावना हो तो वह राक्षस के समान है। अर्थात किसके अंदर और अमानवीय भावना जागृत है तो वह रक्षा के समान है। यहां सच की बात है कि आपकी भावनाओं को कोई दूसरा तौल नहीं सकता। क्योंकि आपकी भावनाओं के अंदर आपके अतिरिक्त कोई नहीं जा सकता।
आपके स्वयं के भावनाओं के अंदर क्या चलता है और कहां तक चलता है इसका रहस्य सिर्फ आपके हाथ में है। या सीधे तौर पर कहीं की आपके मस्तिष्क के अंदर है। आप अपने भावनाओं से स्वयं खेल रहे हो अथवा आपकी भावनाएं आपके साथ खेल रही है यह आपके सिवा और कोई नहीं जानता।
भावनाओं को समझने के लिए अपने बचपन से आज तक भावनाओं के ग्रोथ को देखना पड़ेगा। भावनाएं किस प्रकार धीरे-धीरे बढ़ता गया बढ़ता गया और आज इतना प्रगाढ़ हो गया कि वह हमारे स्वयं के ऊपर हावी हो गया। आपको लगेगा आपके लिए कौन सी बकबक की बातें हैं। परंतु जो इसे समझते होंगे वह जरूर समझेंगे की भावनाओं के द्वारा बहा लेकर जाने का मतलब क्या होता है।
जो किसी मानसिक उलझन में है, जो यह सोचते हैं कि मैं कर पाऊंगा अथवा नहीं कर पाऊंगा। जो सोचते हैं मैं सक्सेस होऊंगा अथवा नहीं सक्सेज होगा। कोई सोचता होगा मुझे हासिल होगा अथवा नहीं होगा। कोई सोचता होगा हमारी इच्छाएं हमारे अनुसार से आए और जाए। कोई सोचता होगा भावनाओं को हम स्वयं संचालित करें। उन्हें मेरी बातें अच्छी लगेंगी। क्योंकि आप ध्यान रखो मरते दम तक यह भावनाएं आपकी पीछा नहीं छोड़ने वाली है।
आज नहीं तो कल आपको अपने भावनाओं के साथ खेलना सीखना पड़ेगा। सोचो यदि आप भावनाओं से खेलना सीख गए। तो भावनाएं सुख छोड़ दुःख देने का प्रयत्न भी नहीं करेगी। भावनाएं आज बार-बार दुःख दे जाता है वह दुःख देना बंद कर सिर्फ आनन्द ही दिया करेगी।