R. Sevak

Writer, Vicharak

प्रेम का लड्ड

जो खाए वह पछताए,जो न खाए वह भी पछताए। कहते हैं, “प्रेम का लड्डू जो खाए वह पछताए।” यह वाक्य जीवन की वास्तविकता को बयां करता है। इंसान की उम्र के साथ दुनिया को देखने का नजरिया लगातार बदलता रहता है। बचपन में दुनिया का रंग-रूप अलग होता है, जवानी में दृष्टि और बदल जाती […]

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सुख की खोज और जीवन

वास्तव में सुख कोई खाने की वस्तु नहीं है, न ही यह किसी बाजार में मिलने वाली चीज़ है। सुख तो मन का वह नर्म स्पर्श है, जिसे अनुभव तो किया जा सकता है, पर पकड़ा नहीं जा सकता। यह भावनाओं की तृप्ति से उत्पन्न होता है—कभी क्षणिक, कभी स्थायी, और कभी केवल एक भ्रम

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मृत्यु के क्षण में मन के दर्पण

मानव जीवन मृत्यु के बिंदु पर आकर एक अनोखे रहस्य से घिर जाता है। अनेक धर्मों और लोक-परंपराओं में यह माना जाता है कि मृत्यु के समय देवदूत या यमदूत प्रकट होते हैं और मनुष्य को उसकी अगली यात्रा की ओर ले जाते हैं। किंतु गहरे चिंतन से देखने पर यह बात स्पष्ट होती है

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सनातन संस्कृति : उद्देश्य, स्वरूप और सत्य की खोज

सनातन साहित्य की कथाओं में मतभेद होना स्वाभाविक है। अनेक लोग जीवन भर इन्हीं मतभेदों में उलझकर अपना समय नष्ट कर देते हैं, जबकि कम ही लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि कथा के पीछे छिपा उद्देश्य क्या है। प्राचीन काल में न तो पुस्तकालय थे, न छापाखाने। धर्मग्रंथ महात्माओं द्वारा हाथ से

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सनातन संस्कृति : एक प्राकृतिक दृष्टि

सनातन धर्म को समझने के लिए सर्वप्रथम इसके इतिहास, मूलभाव और दर्शन को जानना आवश्यक है। आज के कुछ इतिहासकारों के मन में यह भ्रम है कि सनातन धर्म किसी व्यक्ति द्वारा निर्मित कोई पंथ है, जबकि वास्तविकता यह है कि सनातन धर्म एक प्राचीनतम, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक संस्कृति है—जिसे समय के साथ अनेक परंपराओं,

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प्रेम, चिंतन और चेतना

क्या बलपूर्वक प्रेम प्राप्त किया जा सकता है? — नहीं, कभी नहीं।प्रेम में यदि समर्पण न हो, तो वह प्रेम नहीं रह जाता। प्रेम में यदि आशा, स्वार्थ या अपेक्षा जुड़ जाए, तो वह भी प्रेम की श्रेणी से बाहर हो जाता है। ऐसा भाव मात्र शारीरिक आकर्षण या सोचा–समझा बौद्धिक आकर्षण हो सकता है,

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सफलता का अटूट सूत्र

मनुष्य के जीवन में प्रयास का महत्व जितना गहरा है, उतना ही व्यापक भी है। यह सर्वविदित है कि निरंतर किया गया परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता। कोई भी व्यक्ति प्रयास करने में सक्षम होता है, परंतु उस प्रयास का फल कब और कैसे मिलेगा—यह कहना कठिन है। भविष्य का स्वरूप अनिश्चित है; समय किस

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दूरदृष्टि: बुद्धिमान व्यक्ति

मनुष्य के जीवन में दूरदृष्टि का विशेष महत्व होता है। कोई भी व्यक्ति केवल वर्तमान को समझकर संपूर्ण परिस्थितियों पर नियंत्रण नहीं पा सकता। जो लोग भविष्य में आने वाली संभावित कठिनाइयों का अनुमान लगा लेते हैं, वे अपने निर्णयों को अधिक विवेकपूर्ण और प्रभावी बना पाते हैं। यही क्षमता बुद्धिमान व्यक्ति को भीड़ से

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पसंद और नापसंद : मानव अनुभव का दर्पण

प्रकृति में हर जीव की अपनी प्रवृत्तियाँ और आवश्यकताएँ होती हैं। चिड़िया को दाना पसंद है, घोड़े को घास और शेर को मांस—यह उनके स्वभाव, शरीररचना और जीवनशैली का प्रतिबिंब है। जैसे-जैसे हम जटिल जीवों की ओर बढ़ते हैं, उनकी आवश्यकताएँ और पसंदें भी जटिल होती जाती हैं। मानव जीवन में तो यह जटिलता और

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सत्य, प्रकृति और मनुष्य का अनिवार्य सत्य

कौन है जो मरने वाला नहीं? किसके दिल में दर्द नहीं? किसे बुढ़ापा नहीं आएगा?इन प्रश्नों का उत्तर किसी धर्मग्रंथ या दर्शन में छिपा नहीं—यह प्रकृति का सरल, अटल और निर्विवाद नियम है कि जो जन्म लेता है वह एक दिन अवश्य नाशवान है। मनुष्य का जीवन, उसका दुख—सुख, उसका संघर्ष और उसका अंत—सब इसी

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