प्रेम का स्वरूप
प्रेम किसी घर में या अपनी जागीर में उपजने वाला तत्व नहीं है। यह कोई ऐसी वस्तु भी नहीं है जिसे बाज़ार में खरीदा या बेचा जा सके। प्रेम का स्वभाव स्वच्छ, स्वतंत्र और सार्वभौमिक होता है। यह न किसी सीमा में बंधता है और न किसी अधिकार से उत्पन्न होता है।दरअसल, प्रेम का जन्म […]