R. Sevak

Writer, Vicharak

भरोसे की पहचान

“सामाजिक दुश्मन एक बार के लिए पीछा छोड़ सकता है, परंतु अपना हीं भावना रूपी दुश्मन कभी पीछा नहीं छोड़ने वाला।” कोई हम से प्रेम कैसे करें? यदि विचार करें तो कोई भी व्यक्ति किसी को भी अपने को प्रेम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। नफरत और प्रेम दोनों ही एक सिक्के के […]

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प्रेम दर्शन – वास्तविक प्रेम चरित्र

“बिना हमारे समर्पण के हम सिर्फ सामने वाले के समर्पण का इच्छा करें, तो यह गलत होगा और ऐसे प्रेम के बदले  फ्रेम हीं मिलेगा ।” प्रेम का रंग और वास्तविक परिभाषा समझने के लिए भी प्रेम चाहिए। प्रेम वहां से शुरू होता है, जहां बुद्धि अपना कार्य छोड़ देता है। इसीलिए इतिहास में अनेक

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चाणक्य और चंद्रगुप्त का संग- सफलता की अनिवार्य शर्त

इतिहास केवल घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं होता; वह उन विचारों और संबंधों का आईना भी होता है, जिन्होंने सभ्यताओं की दिशा बदली। भारत के इतिहास में चाणक्य और चंद्रगुप्त का संबंध ऐसा ही एक अद्वितीय उदाहरण है — जहाँ बुद्धि और पराक्रम, नीति और कार्य, विचार और कर्म का संगम हुआ। हर व्यक्ति अपने भीतर

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दिल की कमान

काश दिल के अंदर दो दिल होता। टूटे हुए दिल के लिए क्या कहें, इस दुनिया में एक दिल ही तो है जो कहते हैं मानता नहीं! दिल को हर समय कुछ न कुछ चाहिए, दोस्तों से तो चाहिए साथ में दुश्मनों से भी चाहिए। एक मशहूर कहावत है ,टूटा हुआ दिल कहता है- काश!

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मानव का यात्रा

सपनें हीं आनंद देते हैं,पर सपनें ही दर्द भी दे जाते हैं,सपनें तो सपने होते हैं ,अधूरी प्यासकुछ पाने की आशा। एक बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से उस बच्चे के अंदर एक आशा का बनना शुरू हो जाता है,” आशा कौन सी आशा!” कुछ पाने की आशा कुछ बनने की आशा। एक

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वेद दर्शन

ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं……वेद-वेदांत दर्शन समुंद्र के जैसा विशाल है।  संस्कृत भारत दर्शन का प्राचीनतम भाषा है। संस्कृत आज समाज का मुख्य भाषा नहीं है, जिसके वजह से वेदों के शब्दों को आज की प्रचलित भाषा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। समाज में सनातन समाज के कल्याण के लिए एवं बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने

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नारी दर्शन- बहुमूल्य चिंतन

“एक नारी अपने लिए क्या खोजती है ? उसे अपनों से हौसला ,प्रेम  और सम्मान चाहिए। इतिहास गवाह है नारी ही हर जगह प्रेम बांटती आई है‌।” हर बार हर जगह सिर्फ औरत ही क्यों सुने? सामाजिक व्यवस्था में नारी का स्थान कहां है यह सभी को पता है। चर्चा तो बहुत होता है परंतु

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अद्भुत साधन- कर्म योग

भारतवर्ष में संत महात्मा का हमेशा से ही विशेष प्रभाव रहा है। यह वाणी-लेख ”संत एकादश सेवक महाराज” की है । मेरे विचार से यें एक उच्च कोटि के संत हैं और यदा-कदा मेरा उनसे मुलाकात भी होता है। मैंने बहुत संतो को देखा परंतु बिना लाग लपेट के सीधा बोलने वाला यह संत मुझे

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अमृत गीता- ज्ञान का मूल

महानुभाव! श्रीमद्भागवत गीता के बारे में कितना भी कुछ कहा जाए, कम होगा। राम को पसंद करने वाले राम की भक्ति करते हैं। कृष्ण को पसंद करने वाले कृष्ण की भक्ति करते हैं। शिव को प्रसन्न करने वाले शिव की भक्ति करते हैं।इसमें यह कहते हुए किसी प्रकार भी किसी को भी दुविधा नहीं होना

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वास्तविक विरासत

प्राचीन इतिहास से लेकर, आज तक भारत में अनेकों महामानव हुए । उन महामानव को लेकर देश हीं में अनेक पंथ और संप्रदाय हैं। चाहे वह किसी भी जाति धर्म से युक्त व्यक्ति हो, परंतु उनके उद्देश्य तथा क्रियाकलापों में हमेशा से ही सनातन की छवि रहा है। धरती पर अनेक देश है, जहां सिर्फ

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