R. Sevak

Writer, Vicharak

वेद पुराण PDF download

सनातन में सनातन साहित्य का बहुत विशाल भंडार है। एक समय था की वेद पुराण को सुनने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। उसके बाद जब वेद पुराण पर शोध होने लगे उसके बाद वेद पुराण का छपाई करण चालू हो गया। उसके बाद जो भी धर्म आस्था वाले व्यक्ति रहे उनके लिए शास्त्र […]

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जादू-टोना की वास्तविकता

यदि वास्तव में आत्माएं हमारा पीछा करती, तो आज पता नहीं, हर एक व्यक्ति के पीछे, कितनी आत्माएं पड़ी होतीं। अफसोस व्यक्ति अपने आप में चिंतन करें तो सब समझ सकता है। लेकिन भावनाओं का जाल ऐसा होता है, कि व्यक्ति स्वयं से स्वयं को चाह कर भी नहीं निकाल सकता। जादू टोना वास्तविकता में

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गंगा का उपकार

श्री गंगा जी की महिमा,मां गंगा! श्री गंगा जी के बारे में जितना भी कहा जाए कम होगा। भारतीय सनातन वेद संस्कृति में उपकार का महत्व बहुत बड़ा है। थोड़ा भी यदि कोई कुछ करें तो व्यक्ति उसे ईश्वर के सदृश्य मान लेता है। परमेश्वर को मानने की क्रिया इतनी प्रबल है, भक्त देव दानव

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साधकामृत – साधक संजीवनी

श्रीमद्भागवत गीता के ऊपर प्राचीन काल से शोध होते रहा है। श्रीमद्भागवत गीता प्रेमी अपने – अपने अनुसार से गीता जी को समझते रहे और संसार को समझाते रहे। साधक संजीवनी को समझने के लिए सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत गीता के बारे में समझना बहुत ही आवश्यक है। सनातन इतिहास में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा

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मां-बाप और आशा

बच्चे माता-पिता के उस बाग के फूल हैं, जिस बाग के सिवा माता-पिता  के पास और कुछ नहीं होता। बहुत ऐसे बच्चे हैं जो अपने माता-पिता के ऊपर ऐसे इल्जाम भी लगाते हैं, कि हम तो अपने मां बाप के रोमांस का फल है। यह कहने वाला निहायत ही महामूर्ख हो सकता है, क्योंकि पर्दे

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सनातन पर अंधविश्वास

सनातन धर्म में रोग कहते हुए सूनों तो अफसोस होता है। सनातन अपनें पद्धति तथा विचार में सर्व स्वीकार्य संस्कृति को लेकर सर्वोत्तम है। परधर्मि इस पद्धति को मान देते हो न देते हो,  इसमें कोई आश्चर्य नहीं, सब के अपने विचार हो सकते हैं। यदि हम अपने सनातन पद्धति में करीब से देखें तो

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ईश्वर-मंदिर अंधविश्वास चिंतन

भगवान और मंदिर क्यों चाहिए? सनातन संस्कृति में भगवान और मंदिर का महत्व किसी से छिपा हुआ नहीं है। यह सवाल उठता है,कुछ प्रतिशत लोगों के अविश्वास से। एक सवाल अनेक महत्वपूर्ण सवाल को जन्म देता है, जिसे जानना प्रत्येक सनातन अनुयाई को अवश्य है। “क्या वाकई में भगवान है, और वह भी है! तो

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धर्म का भ्रम

मानव धर्म यह किसके लिए है? मानव धर्म वह धर्म नहीं जो हमें अपने धर्म समूह से मिला है। अपना धर्म समूह हमें अपने लिए धर्म सिखाता है परंतु मानव धर्म संपूर्ण समाज के लिए धर्म सिखाता है। वास्तव में कोई धर्म छोड़ना नहीं है। संसार में यदि धर्म की चर्चा की जाए तो सबसे

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राम-रामायण और भ्रम

राम-रामायण और चरित्र यह श्रीराम से अलग नहीं हो सकता। राम के रहने का जो मुख्य स्थान है, वह रामायण है। राम अनंत है और राम का चरित्र भी अनंत है। चर्चा चिंतन के बाद अनेंक प्रकार की संका समाज के अंदर उत्पन्न होता है और व्यक्ति अपने तरीके से उन शंकाओं का समाधान निकालने

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पारिवारिक सुख-शांति

पारिवारिक सुख-शांति में  आपसी प्रेम बहुत बड़ा अपना रोल अदा करता है । जब परिवार धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है, जब परिवार के व्यक्ति एक उम्र से दूसरे उम्र में प्रवेश करते हैं तो धीरे-धीरे वे एक दूसरे से दूर होते चले जाते हैं। एक समय प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे के लिए जान देने

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