R. Sevak

Writer, Vicharak

विवाह की प्रथा

भारतीय संस्कृति में पहले सिर्फ एक हीं विवाह होता था। कहते हैं सात जन्मों का रिश्ता। आज के समय सात जन्मों का रिश्ता महज एक कहावत बनकर प्रचलित है। कल और आज में मानव जमीन आसमान का अंतर हो गया हो। पहले विवाह के बाद कसमें खाते थे, एक दूसरे का साथ निभाने के लिए […]

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वास्तविक नायक – बोस

इतिहास छुपाने से नहीं छुपता। आजादी के बाद जितने भी सरकार में सम्मिलित महत्वपूर्ण समाज सेवक ‌व्यक्ति थे, सभीं को लगभग सरकार से धीरे धीरे पृथक कर दिया गया, या वैसे स्थिति उत्पन्न किया गया कि वे स्वत: दूर हो गए। कहा जाता है व्यक्ति का विश्वास जीवित रहता है। जिन्हें आजादी के बाद देश

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चमत्कार का भ्रम

प्राचीन भारत में, अथवा संसार के अनेक भाग में, प्राचीन समय से चमत्कार होते रहे हैं। चमत्कार के ऊपर भरोसा करने वाले, कम नहीं। चमत्कार दिखाने वाले के लिए क्या करना है, मैजिक दिखाओ और सामने वाले को खुश करो, यह उनका कला है। कहीं-कहीं मैजिक दिखाकर जनता को लूटने का भी काम होते देखा

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रिटायरमेंट के बाद का बिजनेस!

मस्तिष्क को खाली छोड़ अपने को पंगु नहीं बनाना है,सदैव लगे रहना है कर्म में, किसी का आश्रित नहीं बनना है। रिटायरमेंट के बाद क्या करें इस उलझन में व्यक्ति विचार करते रहता है और समय निकल जाता। रिटायरमेंट के बाद इंसान का एक उम्र होता है। जब उम्र का एक निश्चित बंधन हो तो

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रिटायरमेंट के बाद शुरुआत!

“रिटायरमेंट अंत नहीं नये अध्याय की शुरुआत है क्योंकि,रिटायरमेंट के बाद भी कर्म का विचार है तो हीं जीवन है!” रिटायरमेंट जीवन कर्म का अंत नहीं एक नए जीवन की शुरुआत है। मित्रों आराम किसी अच्छा नहीं लगता। सुख किसको प्यारा नहीं। आराम सभीं करना चाहते और सबको सुख प्यारा भी है। वास्तव में रिटायरमेंट

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गर्म लोहे पर ठंडा हथौड़ा

“मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए. लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा। कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों न हो जाये, अंत में तो उसे ठंडा होना हीं पड़ेगा।”विचार- श्री सरदार वल्लभभाई पटेल लोहे से

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डर को भगाओ

डर उसको लगता है जिसे सिर्फ अपनें ऊपर भरोसा रहता है।  वहीं जिसे ईश्वर पर भरोसा हो उसे डर और भविष्य की चिंता नहीं होता। मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः |अगामापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत || २/१४ || हे कुन्तीपुत्र! सुख तथा दुख का क्षणिक उदय तथा कालक्रम में उनका अन्तर्धान होना सर्दी तथा गर्मी की ऋतुओं के आने जाने

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भारतीय विचारधारा दर्शन

सनातन धर्म भारतीय समाज की प्राचीन मुख्य धारा है जो उसके सांस्कृतिक, सामाजिक, और धार्मिक जीवन को आधारित करती है। इसके मूल तत्वों में समर्पण, सहिष्णुता, और संवेदनशीलता की भावना होती है, जो समाज को समृद्धि और समानता की दिशा में अग्रसर करती है। विविधता और आध्यात्मिकता के माध्यम से, सनातन धर्म भारतीय समाज को

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ईश्वर कहां नहीं

ईश्वर कहां नहीं,जगत के कन-कन में भगवान।जिनका गुणगान करते थकते नहीं वेद पुराण।। विज्ञान इस ब्रह्मांड को गुरुत्वाकर्षण के बल पर संचालित होने की बात करता है। परंतु ईश्वर का सत्ता स्वीकार नहीं करना चाहता क्योंकि वह ईश्वर नजर नहीं आता। वेद विज्ञान से पहले से कहता  हुआ आ रहा है , एक चींटी को

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आत्मा का रहस्य 05

सबसे पहले तो यह विचार करें कि हमारी स्वयं की भावना हमारे ज्ञान के अनुरूप चलता है अथवा विपरीत चलता है। क्योंकि आपकी भावनाएं कहां तक और किस तरफ जाती है वह आपके सिवा और कोई नहीं जानता। आप किसी भी डॉक्टर आथवा गुरु किसी के पास भी चले जाओ आपके विपरीत भावनाओं का इलाज

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