R. E. Sevak

सनातन धर्म में ईश्वर का स्वरूप

सनातन धर्म एक अत्यंत प्राचीन और अनुभूत-आधारित विचारधारा है, जिसका उद्देश्य सृष्टि की वास्तविकता को जानना और समझना है। सनातन परंपरा में ईश्वर का स्वरूप अत्यंत गहन और व्यापक विचार का विषय है। समझ की कमी के कारण समाज में प्रायः देवताओं को ही जन्मदाता मान लिया जाता है, जबकि शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया […]

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श्रीराम कथा : चरित्र का चरम आदर्श

संसार में यदि चरित्र के मापदंड की बात की जाए तो श्रीराम कथा से उत्तम उदाहरण कोई दूसरा नहीं हो सकता। श्रीराम कथा लोगों ने अनेक बार और अनेक प्रकार से सुनी है। लगभग प्रत्येक व्यक्ति रामायण के प्रमुख पात्रों के बारे में जानता और समझता है। आज चर्चा श्रीराम कथा की। रामचरितमानस में एक

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वास्तविक भक्त

आज के समय में लोग हर दिशा में ईश्वर को खोजने निकल पड़ते हैं — कोई मंदिर जाता है, कोई तीर्थ, कोई ध्यान में डूब जाता है।लेकिन क्या कभी हमने यह सोचा है कि ईश्वर को खोजने की जरूरत ही क्या है?अगर हमारा मन सच्चा और हृदय पवित्र है, तो वह स्वयं हमारे जीवन में

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माया का बंधन – प्रेरक जीवन प्रसंग

जीवन में हर मनुष्य किसी-न-किसी रूप में बंधन महसूस करता है — कभी धन का, कभी परिवार का, कभी प्रतिष्ठा या इच्छाओं का। हम प्रायः कहते हैं, “यह संसार की माया ने मुझे जकड़ रखा है।” परंतु क्या सचमुच माया ने हमें बाँधा है, या हमने ही माया को पकड़ रखा है? इस प्रश्न का

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ब्रह्म-जिज्ञासा एवं ईश्वर चिंतन

परब्रह्म परमेश्वर का चिंतन करने से पहले “ब्रह्म” शब्द के अर्थ और भाव पर विचार करना आवश्यक है।वेद-साहित्य की मूल भाषा संस्कृत है, और यह वह भाषा है जिसमें मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन विचारों ने शब्द पाया।इसलिए ब्रह्म-जिज्ञासा की चर्चा संस्कृत और वैदिक परंपरा को समझे बिना अधूरी है। संस्कृत का महत्व और ज्ञान

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गीता प्रेस : सनातन धर्म का अमर स्तंभ

गीता प्रेस विश्व का सबसे बड़ा मुद्रण संस्थान है, जो विशेष रूप से सनातन धर्म के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यरत है। यह लेख गीता प्रेस पर एक स्वतंत्र समीक्षा है, जिसमें यथासंभव निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास किया गया है। गीता प्रेस को समाज भली-भांति जानता है, अतः इसके परिचय की आवश्यकता

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सरल और विलक्षण संत – स्वामी रामसुखदास

स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज अपने आप में एक अत्यंत सरल, सादगीपूर्ण और विलक्षण संत थे। उनकी सरलता, सादगी और नि:स्वार्थता की तुलना पूरे संत समाज में किसी से नहीं की जा सकती। भारत के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा महान संत हुआ हो, जो इतने ऊँचे आध्यात्मिक स्थान पर होते हुए भी कभी

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तत्वदर्शी- गृहस्थ संत सुदर्शन सिंह

लेखक अपने विचारों के माध्यम से एक दार्शनिक तत्व को प्रकट करता है। मेरे लिए यह लेख अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज जो कुछ भी मैं लिखता हूं, अथवा मेरे विचारों में जो भी उत्तम शब्द हैं, उनमें से अधिकांश का श्रेय मेरे पूज्य, गृहस्थ संत तत्वदर्शी गुरु जी श्रीमान श्री सुदर्शन सिंह जी को

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भ्रम और प्रार्थना

परमेश्वर भक्ति में अनेकों प्रकार के क्रियाएं कहा गया है। उन क्रियाओं में सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है परमेश्वर से प्रार्थना। प्रार्थना पर भ्रम के ऊपर चिंतन करें उससे पहले हम कुछ और चिंतन करें। आप एक सामान्य व्यक्ति हैं और कोई भी आपके पास आकर अपने प्रेम का इजहार करें। जब वह प्रेम का इजहार

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रामप्रसाद जी महाराज रामसनेही

सनातन संस्कृति में आज भी कितने महान महामानव उपस्थित है इसका गणना नहीं हो सकता। परधर्मी विचारक अपनें को अच्छा बनाने के लिए सनातन धर्म का परिहास करते हैं और अपने अनुसार परधर्म की खूबियां गिनाते हैं। सनातन संस्कृति के महामानव खामोश! अपनें योग साधना में अथवा अपने कर्म में लीन रहते हैं। चुकी सनातन

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