Bhav Bhakti/ भाव-भक्ति

चिंतन विचार इस भाव भक्ति में अत्यंत आवश्यक भूमिका निभाते हैं। जब हम निरंतर ईश्वर के स्वरूप, उनकी लीलाओं, गुणों और उनके प्रति अपने संबंध का चिंतन-मनन करते हैं, तो हमारे भीतर की भक्ति भावना और भी अधिक प्रबल होती है। यह चिंतन हमारे मन को एकाग्र करता है, अहंकार को कम करता है, मार्ग प्रशस्त करता है और हृदय में प्रेम, करुणा व दया जैसे भावों का विकास करता है।

आत्मा का रहस्य 05

सबसे पहले तो यह विचार करें कि हमारी स्वयं की भावना हमारे ज्ञान के अनुरूप चलता है अथवा विपरीत चलता है। क्योंकि आपकी भावनाएं कहां तक और किस तरफ जाती है वह आपके सिवा और कोई नहीं जानता। आप किसी भी डॉक्टर आथवा गुरु किसी के पास भी चले जाओ आपके विपरीत भावनाओं का इलाज […]

आत्मा का रहस्य 05 Read More »

आत्मा का रहस्य 04

आत्मा और शरीर को बिल्कुल अलग-अलग समझना होगा। जब तक बिल्कुल अलग-अलग रूप में नहीं देखेंगे तब तक हम इन दोनों से भावनाओं को अलग नहीं देख पाएंगे। क्योंकि हमारी भावनाएं ही है जो सब कुछ करने पर मजबूर करता है। ऐसा की कहां की हम बचपन से अपने भावनाओं के निर्माण करता है और

आत्मा का रहस्य 04 Read More »

आत्मा का रहस्य 03

सबको पता है शरीर से आत्मा जब निकलता है उसे वक्त कुछ भी नजर नहीं आता। जैसा कि मैंने कहा आत्मा दिखता नहीं इसका मतलब यह नहीं कहा जा सकता की आत्मा नहीं होता। आत्मा शरीर के अंदर रहकर यह जग को प्रमाणित करता है कि मैं हूं और मेरी शक्ति है। आत्मा बार-बार कहता

आत्मा का रहस्य 03 Read More »

आत्मा का रहस्य 02

भाग दो में हमने पढ़ा आत्मा और शरीर एक सिक्के के दो पहलू हैं। एक के बिना एक का अस्तित्व नहीं।आगे यह जानने की कोशिश की आत्माएं सिर्फ अपनों के पीछे क्यों पड़ती है। आत्मा मरने के बाद किसी दुश्मन के पीछे क्यों नहीं पड़ती जिससे उसके अपनों का भला हो सके। इस बात को

आत्मा का रहस्य 02 Read More »

आत्मा का रहस्य – 01

किसी के बस में नहीं होता कि निकलने के बाद वह वापस उस शरीर में प्राण डाल दें। कारण सबको पता है आत्मा किसी का गुलाम नहीं होता। वास्तव में अपना शरीर भी किसी का गुलाम नहीं है। यदि बड़ी की से देखे तो पता चलता है शरीर सिर्फ और सिर्फ प्रकृति का गुलाम है।

आत्मा का रहस्य – 01 Read More »

ईश्वर-शक्ति चिंतन

“जिसने ईश्वर को देखा है, वह ईश्वर को व्यक्त नहीं कर सकता। यदि कोई ईश्वर को व्यक्त किया है इसका मतलब उसने ईश्वर को नहीं देखा।” आज तक प्राप्त जानकारी से हमें पता है कि ईश्वर के ऊपर, चिंतन करोड़ों वर्षों से होते रहा है। जिस किसी ने भी उस परम शक्ति ईश्वर से मन

ईश्वर-शक्ति चिंतन Read More »

एक राजकुमार आया था- एकादश रामायण-01

एक राजकुमार आया थापिता के अनेक यतन से था।आते ही वह सबके मन को भाया थाब्रम्ह स्वयं राम रुप में आया थाऔर वह अकेले नहीं अनेंक सेवक तथाअपनी सदैव की सहयोगीनी एवं जगत मातामहामाया को भी साथ लाया था एक राजकुमार आया थास्वयं ब्रम्ह होकर मनुष्य का जीवन जीने आया थावह मनुष्य जीवन जीते हूए

एक राजकुमार आया था- एकादश रामायण-01 Read More »

गुरु ज्ञान और ईश्वर

गुर बिनु भव निध तरइ न कोई।जौं  बिरंचि  संकर  सम  होई॥ तुलसी बाबा गुरु के महत्व के बारे में कहते हैं:  गुरु के बिना कोई भी भवसागर पार नहीं कर सकता, चाहे वह ब्रह्मा जी और शंकर जी के समान ही क्यों ना हो। गुरु का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। गुरु के

गुरु ज्ञान और ईश्वर Read More »

इंद्रियों की भोग शक्ति

विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः |रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते || २/५९ || भगवान श्रीमद् भागवत गीता में अर्जुन से कहते हैं –  देहधारी जीव इन्द्रियभोग से भले ही निवृत्त हो जाय पर उसमें इन्द्रियभोगों की इच्छा बनी रहती है | लेकिन उत्तम रस के अनुभव होने से ऐसे कार्यों को बन्द करने पर वह भक्ति

इंद्रियों की भोग शक्ति Read More »

रामचरितमानस चिंतन-विचार

एहि महँ रघुपति नाम उदारा।अति पावन पुरान श्रुति सारा॥मंगल भवन अमंगल हारी।उमा सहित जेहि जपत पुरारी॥ श्री तुलसीदास जी महाराज रामचरितमानस के लिए अपना विचार रखते हुए कहते हैं  : रामचरितमानस में श्री रघुनाथजी का उदार नाम है, जो अत्यन्त पवित्र है, वेद-पुराणों का सार है, मंगल  करने वाला और अमंगल को हरने वाला है,

रामचरितमानस चिंतन-विचार Read More »