kadvi baat-/कड़वी बात

“कड़वी बातों पर विचार करना आसान नहीं होता, लेकिन अक्सर वही बातें हमें सच्चाई से अवगत कराती हैं। यह लेख उन कटु सत्यों के मनन पर आधारित है जो हमें भीतर तक झकझोर सकते हैं, लेकिन अगर हम इन पर गंभीरता से चिंतन करें, तो जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने की समझ मिल सकती है। कभी-कभी वही बात जो आज चुभती है, कल हमारी सबसे बड़ी सीख बन जाती है।”

वृद्धावस्था का टॉनिक

वृद्धावस्था का टॉनिक, जो जीवन को जीने का विश्वास देता है, वह परम आवश्यक है। वृद्धावस्था में जब समाज धीरे-धीरे साथ छोड़ने लगता है, तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे सभी अपने-अपने तरीके से पिंड छुड़ाने लगे हों। यद्यपि अनेक लोग दिलासा देने का कार्य करते हैं, कुछ उनमें से विश्वास जगाने का भी प्रयास […]

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भरोसे की पहचान

“सामाजिक दुश्मन एक बार के लिए पीछा छोड़ सकता है, परंतु अपना हीं भावना रूपी दुश्मन कभी पीछा नहीं छोड़ने वाला।” कोई हम से प्रेम कैसे करें? यदि विचार करें तो कोई भी व्यक्ति किसी को भी अपने को प्रेम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। नफरत और प्रेम दोनों ही एक सिक्के के

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प्रेम दर्शन – वास्तविक प्रेम चरित्र

“बिना हमारे समर्पण के हम सिर्फ सामने वाले के समर्पण का इच्छा करें, तो यह गलत होगा और ऐसे प्रेम के बदले  फ्रेम हीं मिलेगा ।” प्रेम का रंग और वास्तविक परिभाषा समझने के लिए भी प्रेम चाहिए। प्रेम वहां से शुरू होता है, जहां बुद्धि अपना कार्य छोड़ देता है। इसीलिए इतिहास में अनेक

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दिल की कमान

काश दिल के अंदर दो दिल होता। टूटे हुए दिल के लिए क्या कहें, इस दुनिया में एक दिल ही तो है जो कहते हैं मानता नहीं! दिल को हर समय कुछ न कुछ चाहिए, दोस्तों से तो चाहिए साथ में दुश्मनों से भी चाहिए। एक मशहूर कहावत है ,टूटा हुआ दिल कहता है- काश!

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मानव का यात्रा

सपनें हीं आनंद देते हैं,पर सपनें ही दर्द भी दे जाते हैं,सपनें तो सपने होते हैं ,अधूरी प्यासकुछ पाने की आशा। एक बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से उस बच्चे के अंदर एक आशा का बनना शुरू हो जाता है,” आशा कौन सी आशा!” कुछ पाने की आशा कुछ बनने की आशा। एक

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सनातन पर अंधविश्वास

सनातन धर्म में रोग कहते हुए सूनों तो अफसोस होता है। सनातन अपनें पद्धति तथा विचार में सर्व स्वीकार्य संस्कृति को लेकर सर्वोत्तम है। परधर्मि इस पद्धति को मान देते हो न देते हो,  इसमें कोई आश्चर्य नहीं, सब के अपने विचार हो सकते हैं। यदि हम अपने सनातन पद्धति में करीब से देखें तो

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चमत्कार का भ्रम

प्राचीन भारत में, अथवा संसार के अनेक भाग में, प्राचीन समय से चमत्कार होते रहे हैं। चमत्कार के ऊपर भरोसा करने वाले, कम नहीं। चमत्कार दिखाने वाले के लिए क्या करना है, मैजिक दिखाओ और सामने वाले को खुश करो, यह उनका कला है। कहीं-कहीं मैजिक दिखाकर जनता को लूटने का भी काम होते देखा

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रिटायरमेंट के बाद का बिजनेस!

मस्तिष्क को खाली छोड़ अपने को पंगु नहीं बनाना है,सदैव लगे रहना है कर्म में, किसी का आश्रित नहीं बनना है। रिटायरमेंट के बाद क्या करें इस उलझन में व्यक्ति विचार करते रहता है और समय निकल जाता। रिटायरमेंट के बाद इंसान का एक उम्र होता है। जब उम्र का एक निश्चित बंधन हो तो

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रिटायरमेंट के बाद शुरुआत!

“रिटायरमेंट अंत नहीं नये अध्याय की शुरुआत है क्योंकि,रिटायरमेंट के बाद भी कर्म का विचार है तो हीं जीवन है!” रिटायरमेंट जीवन कर्म का अंत नहीं एक नए जीवन की शुरुआत है। मित्रों आराम किसी अच्छा नहीं लगता। सुख किसको प्यारा नहीं। आराम सभीं करना चाहते और सबको सुख प्यारा भी है। वास्तव में रिटायरमेंट

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डर को भगाओ

डर उसको लगता है जिसे सिर्फ अपनें ऊपर भरोसा रहता है।  वहीं जिसे ईश्वर पर भरोसा हो उसे डर और भविष्य की चिंता नहीं होता। मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः |अगामापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत || २/१४ || हे कुन्तीपुत्र! सुख तथा दुख का क्षणिक उदय तथा कालक्रम में उनका अन्तर्धान होना सर्दी तथा गर्मी की ऋतुओं के आने जाने

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