kadvi baat-/कड़वी बात

“कड़वी बातों पर विचार करना आसान नहीं होता, लेकिन अक्सर वही बातें हमें सच्चाई से अवगत कराती हैं। यह लेख उन कटु सत्यों के मनन पर आधारित है जो हमें भीतर तक झकझोर सकते हैं, लेकिन अगर हम इन पर गंभीरता से चिंतन करें, तो जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने की समझ मिल सकती है। कभी-कभी वही बात जो आज चुभती है, कल हमारी सबसे बड़ी सीख बन जाती है।”

बल और ज्ञान का भ्रम

सत्य को असत्य मानने वाला ज्ञान !ज्ञान नहीं ज्ञान के नाम से भ्रम है। इस धरती पर कितना भी बलशाली व्यक्ति क्यों ना हो। परंतु यदि वह अत्याचार, दुराचार अथवा अहंकार को लेकर समाज में कुछ गलत करता है। वह किसी भी प्रकार से पाप का अथवा दंड का भागी होता है। रावण तक का […]

बल और ज्ञान का भ्रम Read More »

नशा का फ़साना

“नशा अपनों  और परिवार से दूर लेकर जाता है। नशा परिवार में कलह का सबसे बड़ा कारण बनता है।” मित्रों नशा कितना हानिकारक है आपके और आपके परिवार वालों के लिए इससे पूरी दुनिया परिचित है। किसी भी प्रकार का नशा आपके लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। नशा आपके शरीर को भी नुकसान पहुंचता

नशा का फ़साना Read More »

दिल की हरकतें

हद से गुजरते, सपनों की दरिया,कभी जन्नत तो कभी आग का दरिया। दिल के पास अपनी जुबान नहीं होती, लेकिन उसकी हरकतें और इशारे बहुत कुछ कह जाते हैं। दिल के तेवर और भावनाएं अक्सर बिना शब्दों के भी समझ में आती हैं। जब किसी की भावनाओं को समझना या उसके साथ एकान्त में संवाद

दिल की हरकतें Read More »

औरत-मर्द में विशेष

औरत हो या मर्द सबको होता है दर्द,सिक्के के दो पहलू, दोनों करो गर्व। इसे समझने के लिए सर्वप्रथम औरत और मर्द के गुण को अलग-अलग समझना पड़ेगा। जैसे महिलाओं और पुरुषों दोनों में अनेक गुण होते हैं। महिलाओं की ओर से विशेष रूप से संजीवनी, सहानुभूतिशीलता, और दृढ़ संवेदनशीलता के गुण माने जाते हैं।

औरत-मर्द में विशेष Read More »

ग़म का साथी

हस्तक्षेप से भरी, हर राह का मोड़,दिल की धड़कन, अपनी हीं राह बनाती। कहते हैं दुःख में अपना साया तक साथ छोड़ने लगता है। सुख में अनेंक साथी मिलते हैं पर दुःख में कोई नहीं। प्रकृति हर पल हस्तक्षेप करती है। जीवन के हर मोड़ पर अवरोध उत्पन्न होता है। फिर भी जीवन पर्यंत दिल

ग़म का साथी Read More »

अधिक बल बुद्धि का नाश

एक ताकतवर को खत्म करने के लिए भगवान दूसरा पैदा करता है। यदि वास्तविकता में देखें तो यह प्रकृति का महामंत्र है। यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌ ॥ ॥परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्‌ ।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ 4.7-8 ॥ जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती

अधिक बल बुद्धि का नाश Read More »

कमजोरी लक्ष्य में बाधा

“कभी भी ईश्वर इंसान को कमजोरी देकर पैदा नहीं करता। प्रकृति में इंसान अपनी कमजोरियां स्वयं पैदा करता है।“ किसी भी स्थिति में ईश्वर को दोष दे देते हैं लोग। ‌ ईश्वर को दोष देना बहुत आसान है। जबकि हमारे पूर्वजों ने अपना विचार प्रकट किया है कि ईश्वर किसी के सुख-दुखों में सम्मिलित नहीं

कमजोरी लक्ष्य में बाधा Read More »

दुनियां में कितना गम है

गम की दुनिया बहुत बड़ी है। इतनी बड़ी की गम में पड़ा हुआ इंसान उसकी गहराई माप नहीं सकता। जो व्यक्ति गम में जी रहा होता उसे गम की दुनिया एक प्रकार से दलदल के समान प्रतीत होता है। इन्हीं भावनाओं को  यदि शायरी में व्यक्त किया जाए। कोई यह न सोचो, गम में सिर्फ

दुनियां में कितना गम है Read More »

गुरु ज्ञान और ईश्वर

गुर बिनु भव निध तरइ न कोई।जौं  बिरंचि  संकर  सम  होई॥ तुलसी बाबा गुरु के महत्व के बारे में कहते हैं:  गुरु के बिना कोई भी भवसागर पार नहीं कर सकता, चाहे वह ब्रह्मा जी और शंकर जी के समान ही क्यों ना हो। गुरु का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। गुरु के

गुरु ज्ञान और ईश्वर Read More »

मानव में त्रिगुण का जाल

त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन |निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् || २/४५ || भगवान श्रीमद् भागवत गीता में अर्जुन से स्पष्ट कहते हैं।वेदों में मुख्यतया प्रकृति के तीनों गुणों का वर्णन हुआ है ।हे अर्जुन! इन तीनों गुणों से ऊपर उठो | समस्त द्वैतों और लाभ तथा सुरक्षा की सारी चिन्ताओं से मुक्त होकर आत्म-परायण बनो ।

मानव में त्रिगुण का जाल Read More »