kadvi baat-/कड़वी बात

“कड़वी बातों पर विचार करना आसान नहीं होता, लेकिन अक्सर वही बातें हमें सच्चाई से अवगत कराती हैं। यह लेख उन कटु सत्यों के मनन पर आधारित है जो हमें भीतर तक झकझोर सकते हैं, लेकिन अगर हम इन पर गंभीरता से चिंतन करें, तो जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने की समझ मिल सकती है। कभी-कभी वही बात जो आज चुभती है, कल हमारी सबसे बड़ी सीख बन जाती है।”

समय की पुकार

समय की भाषा समझना अत्यंत आवश्यक है। अभी नहीं समझोगे तो कब समझोगे। सभी के जीवन की अपनी एक कहानी है। समय के साथ जीना सीखो , समय के विपरीत जब व्यक्ति चलता है तब तूफान आता है। जब तूफान आता है तो व्यक्ति अस्त व्यस्त हो जाता है। इस बात को मानो, यदि नहीं […]

समय की पुकार Read More »

कहां दिल लगाए बैठे

कहां दिल लगाए बैठे हो, जहां दिल लगाए बैठे हो निश्चित तौर पर वह दिल तोड़ जाएगा। यकीन मानो एक न एक दिन तुम्हें छोड़ जाएगा। इसलिए हमारे महात्माओं ने कहा है ‘मंगल भवन अमंगल हारी’। तुम अपने ईश्वर जो मंगल का घर है,मंगल का महल है, जो समस्त अमंगलों को हरने वाला है। उस

कहां दिल लगाए बैठे Read More »

भक्त बनने का ढोंग

दुनिया में मशहूर हो , पूजा पाठ करने वाला व्यक्ति है। सही बात है होना भी चाहिए और करना भी चाहिए। तुम्हारा दिल जानता है तुम भगवान के लिए भगवान के पास कितनी बार जाते हो। अफसोस है तुम जितनी बार जाते हो उतनी बार संसारिक जरूरतों के लिए जाते हो। कौन सा व्रत और

भक्त बनने का ढोंग Read More »

दुःख के कारण

जीवन एक निरंतर परिवर्तनशील धारा है, जिसमें सुख और दुःख दोनों प्रवाहमान हैं। जैसे दिन के बाद रात आती है और वर्षा के बाद धूप खिलती है, वैसे ही जीवन में भी सुख के साथ दुःख का आना स्वाभाविक है। परंतु समस्या यह है कि मनुष्य सुख के क्षणों में इतना तल्लीन हो जाता है

दुःख के कारण Read More »

शिकायत किससे करते हो

मनुष्य स्वभाव से भावनाओं का जीव है। जब हम किसी से जुड़ते हैं, तो उसके स्वभाव, आदतें और उसके होने का तरीका हमें आकर्षित करता है। यही बातें हमें उसकी ओर खींचती हैं, हमें उसके करीब लाती हैं। लेकिन समय बीतने के साथ, वही बातें जो कभी हमें प्यारी लगती थीं, वही हमारी शिकायतों का

शिकायत किससे करते हो Read More »

माता को माता मत कहो

किसी को धरती को माता कहने में तकलीफ होता है। गंगा को गंगा माता कहने में तकलीफ होता है। प्रकृति को माता कहने में तकलीफ होता है। पंचतत्व से निर्मित यह प्रकृति अनेक जीव और वनस्पतियों का निर्माण करती है। एक दिन अंत समय में सभी निर्माण वनस्पति और जीव स्वत: पंचतत्व में विलीन हो

माता को माता मत कहो Read More »

यह पल वापस कल नहीं

जीवन का सफ़र बहुत तेज़ी से आगे बढ़ता है। जो पल बीत जाते हैं, वे कभी लौटकर नहीं आते। अगर हम ज़रा गहराई से देखें, तो महसूस होगा कि समय हमसे कितनी तेज़ी से निकल रहा है। हर दिन, हर क्षण हमारे जीवन से कुछ न कुछ ले जाता है और कुछ नया दे जाता

यह पल वापस कल नहीं Read More »

पहचान अपना कौन

कहने को तो इस संसार में सभी अपने होते हैं, कोई पराया नहीं लगता। परंतु जब जीवन में मुसीबत या लाचारी का समय आता है, तब वास्तविकता का अनुभव होता है और हमें सच्चे अपनों की पहचान मिलती है। सुख के समय जो साथ दिखाई देते हैं, वे दुःख के क्षणों में प्रायः दूर हो

पहचान अपना कौन Read More »

नाच न जाने आंगन टेढ़ा

इस कहावत का गूढ़ अर्थ यह है कि जब किसी कार्य में असफलता मिलती है, तो व्यक्ति अपनी असमर्थता स्वीकार करने के बजाय बाहरी कारणों को दोष देता है। जैसे नृत्य करना न आना कोई असामान्य बात नहीं है – कोई भी हर क्षेत्र में दक्ष नहीं हो सकता। लेकिन दोष अपने अभ्यास या प्रयास

नाच न जाने आंगन टेढ़ा Read More »

दिल में ईश्वर के लिए जगह

जिनके कपट, दम्भ नहिं माया।तिनके ह्रदय बसहु रघुराया॥ तुलसी बाबा कहते हैं जिनके अंदर पहले से कपट, दंभ और माया का निवास है उनके अंदर ईश्वर का वास नहीं होता। यदि हृदय में ईश्वर का वास कराना हो तो पहले इन सब तत्वों का त्याग आवश्यक है। घर में ईश्वर को बुलाने के लिए बहुत

दिल में ईश्वर के लिए जगह Read More »