Samaj-Parivar Vichar / समाज परिवार – विचार

परिवार समाज की नींव है, जहाँ संस्कार और मूल्य जन्म लेते हैं। एक सशक्त परिवार से हीं सशक्त समाज बनता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और संतुलन आवश्यक है। समाज में भी सभी वर्ग के लोगों को एक साथ सामंजस्य से बिठाकर साथ चलना भी समाज की आवश्यकता है।

मां-बाप और आशा

बच्चे माता-पिता के उस बाग के फूल हैं, जिस बाग के सिवा माता-पिता  के पास और कुछ नहीं होता। बहुत ऐसे बच्चे हैं जो अपने माता-पिता के ऊपर ऐसे इल्जाम भी लगाते हैं, कि हम तो अपने मां बाप के रोमांस का फल है। यह कहने वाला निहायत ही महामूर्ख हो सकता है, क्योंकि पर्दे […]

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पारिवारिक सुख-शांति

पारिवारिक सुख-शांति में  आपसी प्रेम बहुत बड़ा अपना रोल अदा करता है । जब परिवार धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है, जब परिवार के व्यक्ति एक उम्र से दूसरे उम्र में प्रवेश करते हैं तो धीरे-धीरे वे एक दूसरे से दूर होते चले जाते हैं। एक समय प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे के लिए जान देने

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विवाह की प्रथा

भारतीय संस्कृति में पहले सिर्फ एक हीं विवाह होता था। कहते हैं सात जन्मों का रिश्ता। आज के समय सात जन्मों का रिश्ता महज एक कहावत बनकर प्रचलित है। कल और आज में मानव जमीन आसमान का अंतर हो गया हो। पहले विवाह के बाद कसमें खाते थे, एक दूसरे का साथ निभाने के लिए

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