Vichardhara Manthan / विचारधारा मंथन

प्राचीन भारतीय विचारधारा कहता है हिन्दू अपनें विचार से हीं सेकुलर है। इस विचारधारा में सबका सम्मान है, सबकी रक्षा है। यह मानवता के वास्तविक उत्तम सिद्धांत को स्वीकार करता है। अपने सनातन संस्कृति से जुड़े हर एक हिंदूत्व विचारों का यह कर्तव्य है कि वह अपनीं नस्लों के लिए सभ्य संस्कृति प्रदान करने की कोशिश करें। अपनें संस्कृति पर सबको विचार करना होगा , प्रेम करना होगा। हर संभव पर्यंत नित्य-निरंतर संरक्षण की कोशिश करनी होगी। हिन्दू होना गर्व की बात है। सदैव गर्व से कहें हम हिंदू हैं।

सनातन संस्कृति किस लिए- संदेश

“सनातन” शब्द अपने आप में ही अनादि और अनंत का भाव समेटे हुए है। यदि प्राचीनता की कोई उपमा दी जाए, तो वह सनातन ही है। सनातन धर्म, सनातन पद्धति और सनातन साहित्य—इन सबका नित्य अध्ययन, मनन और उपदेश प्राचीन काल से ही चलते आ रहे हैं। हमारे महान ऋषि-मुनियों ने समय-समय पर सनातन संस्कृति […]

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सनातन में ईश्वर नहीं थोपे जाते, चुने जाते हैं

सनातन धर्म में रामायण एक अद्वितीय ग्रंथ है, और उसमें वर्णित पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र सर्वोपरि माना जाता है। रामायण केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक चरित्र-प्रधान ग्रंथ है, जो अनेक भाषाओं और टीकाओं में उपलब्ध है। समाज में इस ग्रंथ के साथ-साथ उसमें वर्णित चरित्रों की पूजा भी होती है। फिर भी कुछ लोग

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सनातन संस्कृति : उद्देश्य, स्वरूप और सत्य की खोज

सनातन साहित्य की कथाओं में मतभेद होना स्वाभाविक है। अनेक लोग जीवन भर इन्हीं मतभेदों में उलझकर अपना समय नष्ट कर देते हैं, जबकि कम ही लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि कथा के पीछे छिपा उद्देश्य क्या है। प्राचीन काल में न तो पुस्तकालय थे, न छापाखाने। धर्मग्रंथ महात्माओं द्वारा हाथ से

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सनातन संस्कृति : एक प्राकृतिक दृष्टि

सनातन धर्म को समझने के लिए सर्वप्रथम इसके इतिहास, मूलभाव और दर्शन को जानना आवश्यक है। आज के कुछ इतिहासकारों के मन में यह भ्रम है कि सनातन धर्म किसी व्यक्ति द्वारा निर्मित कोई पंथ है, जबकि वास्तविकता यह है कि सनातन धर्म एक प्राचीनतम, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक संस्कृति है—जिसे समय के साथ अनेक परंपराओं,

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भारत – सोने की चिड़िया और सनातन संस्कृति का मूल

“सोने की चिड़िया”, यह शब्द हम सभी ने बचपन से कई बार सुना है। धरती पर भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। एक समय था जब आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भारत विश्व में प्रथम स्थान पर था। विदेशी यात्री भारत की समृद्धि, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से आकर्षित होकर यहां

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वास्तविक विरासत

प्राचीन इतिहास से लेकर, आज तक भारत में अनेकों महामानव हुए । उन महामानव को लेकर देश हीं में अनेक पंथ और संप्रदाय हैं। चाहे वह किसी भी जाति धर्म से युक्त व्यक्ति हो, परंतु उनके उद्देश्य तथा क्रियाकलापों में हमेशा से ही सनातन की छवि रहा है। धरती पर अनेक देश है, जहां सिर्फ

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धर्म का भ्रम

मानव धर्म यह किसके लिए है? मानव धर्म वह धर्म नहीं जो हमें अपने धर्म समूह से मिला है। अपना धर्म समूह हमें अपने लिए धर्म सिखाता है परंतु मानव धर्म संपूर्ण समाज के लिए धर्म सिखाता है। वास्तव में कोई धर्म छोड़ना नहीं है। संसार में यदि धर्म की चर्चा की जाए तो सबसे

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भारतीय विचारधारा दर्शन

सनातन धर्म भारतीय समाज की प्राचीन मुख्य धारा है जो उसके सांस्कृतिक, सामाजिक, और धार्मिक जीवन को आधारित करती है। इसके मूल तत्वों में समर्पण, सहिष्णुता, और संवेदनशीलता की भावना होती है, जो समाज को समृद्धि और समानता की दिशा में अग्रसर करती है। विविधता और आध्यात्मिकता के माध्यम से, सनातन धर्म भारतीय समाज को

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