Ved-Puran Vichar वेद-पुराण विचार

वेद और पुराण भारतीय संस्कृति में ज्ञान-परंपरा के दो महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं, जो न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि चिंतन, जीवन चर्या, दर्शन और मनुष्य के आचरण से जुड़ी गूढ़ और गहन अवधारणाओं को भी प्रस्तुत करते हैं। वास्तव में वेद-पुराण में चिंतन और विचार केवल ज्ञान का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और आत्मा की गहराई को समझने का माध्यम हैं।

गरुड़ पुराण : जीवन का दर्शन

सनातन धर्म के विशाल साहित्य में अनेक पुराण अपनी-अपनी विशेषताओं के कारण पूजनीय माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है गरुड़ पुराण, जिसे अनेक जन पितृकर्म के संदर्भ में ही जानते हैं; परन्तु वस्तुतः यह पुराण महापुराणों की श्रेणी में एक अद्भुत ग्रंथ है, जो मनुष्य के जीवन, मृत्यु, चरित्र, कर्म, ज्ञान एवं आध्यात्मिक […]

गरुड़ पुराण : जीवन का दर्शन Read More »

श्रीराम कथा : चरित्र का चरम आदर्श

संसार में यदि चरित्र के मापदंड की बात की जाए तो श्रीराम कथा से उत्तम उदाहरण कोई दूसरा नहीं हो सकता। श्रीराम कथा लोगों ने अनेक बार और अनेक प्रकार से सुनी है। लगभग प्रत्येक व्यक्ति रामायण के प्रमुख पात्रों के बारे में जानता और समझता है। आज चर्चा श्रीराम कथा की। रामचरितमानस में एक

श्रीराम कथा : चरित्र का चरम आदर्श Read More »

महाभारत-भारतीय संस्कृति का महासाहित्य

भारत का इतिहास और सनातन पद्धति अत्यंत विविध और गहरे अर्थों से भरे हुए हैं। यहां के धर्म ग्रंथों का अद्वितीय समूह केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू को समझने, जीने और संघर्ष करने की एक अमूल्य धरोहर है। इनमें वेद, उपनिषद, पुराण, गीता, रामायण, महाभारत, रामचरितमानस, और अनेकों महापुरुषों

महाभारत-भारतीय संस्कृति का महासाहित्य Read More »

गीता प्रेस : सनातन धर्म का अमर स्तंभ

गीता प्रेस विश्व का सबसे बड़ा मुद्रण संस्थान है, जो विशेष रूप से सनातन धर्म के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यरत है। यह लेख गीता प्रेस पर एक स्वतंत्र समीक्षा है, जिसमें यथासंभव निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास किया गया है। गीता प्रेस को समाज भली-भांति जानता है, अतः इसके परिचय की आवश्यकता

गीता प्रेस : सनातन धर्म का अमर स्तंभ Read More »

वेद दर्शन

ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं……वेद-वेदांत दर्शन समुंद्र के जैसा विशाल है।  संस्कृत भारत दर्शन का प्राचीनतम भाषा है। संस्कृत आज समाज का मुख्य भाषा नहीं है, जिसके वजह से वेदों के शब्दों को आज की प्रचलित भाषा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। समाज में सनातन समाज के कल्याण के लिए एवं बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने

वेद दर्शन Read More »

अमृत गीता- ज्ञान का मूल

महानुभाव! श्रीमद्भागवत गीता के बारे में कितना भी कुछ कहा जाए, कम होगा। राम को पसंद करने वाले राम की भक्ति करते हैं। कृष्ण को पसंद करने वाले कृष्ण की भक्ति करते हैं। शिव को प्रसन्न करने वाले शिव की भक्ति करते हैं।इसमें यह कहते हुए किसी प्रकार भी किसी को भी दुविधा नहीं होना

अमृत गीता- ज्ञान का मूल Read More »

वेद पुराण PDF download

सनातन में सनातन साहित्य का बहुत विशाल भंडार है। एक समय था की वेद पुराण को सुनने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। उसके बाद जब वेद पुराण पर शोध होने लगे उसके बाद वेद पुराण का छपाई करण चालू हो गया। उसके बाद जो भी धर्म आस्था वाले व्यक्ति रहे उनके लिए शास्त्र

वेद पुराण PDF download Read More »

गंगा का उपकार

श्री गंगा जी की महिमा,मां गंगा! श्री गंगा जी के बारे में जितना भी कहा जाए कम होगा। भारतीय सनातन वेद संस्कृति में उपकार का महत्व बहुत बड़ा है। थोड़ा भी यदि कोई कुछ करें तो व्यक्ति उसे ईश्वर के सदृश्य मान लेता है। परमेश्वर को मानने की क्रिया इतनी प्रबल है, भक्त देव दानव

गंगा का उपकार Read More »

साधकामृत – साधक संजीवनी

श्रीमद्भागवत गीता के ऊपर प्राचीन काल से शोध होते रहा है। श्रीमद्भागवत गीता प्रेमी अपने – अपने अनुसार से गीता जी को समझते रहे और संसार को समझाते रहे। साधक संजीवनी को समझने के लिए सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत गीता के बारे में समझना बहुत ही आवश्यक है। सनातन इतिहास में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा

साधकामृत – साधक संजीवनी Read More »

राम-रामायण और भ्रम

राम-रामायण और चरित्र यह श्रीराम से अलग नहीं हो सकता। राम के रहने का जो मुख्य स्थान है, वह रामायण है। राम अनंत है और राम का चरित्र भी अनंत है। चर्चा चिंतन के बाद अनेंक प्रकार की संका समाज के अंदर उत्पन्न होता है और व्यक्ति अपने तरीके से उन शंकाओं का समाधान निकालने

राम-रामायण और भ्रम Read More »