प्राचीन भारत में, अथवा संसार के अनेक भाग में, प्राचीन समय से चमत्कार होते रहे हैं। चमत्कार के ऊपर भरोसा करने वाले, कम नहीं। चमत्कार दिखाने वाले के लिए क्या करना है, मैजिक दिखाओ और सामने वाले को खुश करो, यह उनका कला है। कहीं-कहीं मैजिक दिखाकर जनता को लूटने का भी काम होते देखा गया है।

असंभव होने वाला कार्य , या कोई रहस्य जो व्यक्ति को समझ में ना आता हो, अथवा वह यदि न समझ पाए तो उसे वह, या तो मैजिक लगता है, या फिर कोई चमत्कार। पुराना एक कहावत है चमत्कार को नमस्कार!
कोई कहता है , ईश्वर का चमत्कार मेरे पास है, वास्तव में ईश्वर ने जो कुछ बनाया है ,संसार में वह सब के सब चमत्कार हीं है। धर्म साधना किसी भी माध्यम से हो, अंततः परमेश्वर का ज्ञान हीं, साधना का लक्ष्य है।
जब व्यक्ति के पास वास्तविक परमेश्वर का जनकारी आ जाए, अथवा उसे परमेश्वर का ज्ञान हो जाए ,वह कभी किसी को चमत्कार नहीं दिखा सकता। कोई चमत्कार दिखाने वाला वास्तव में, अपना हित तो साध सकता है, परंतु वास्तविक से दूर, जो सिर्फ आंखो का भ्रम है, जो बुद्धि के ऊपर पर्दा डालकर दिखाया जाता है, वह चमत्कार संसार में मनोरंजन के सिवा और कुछ नहीं है।
यदि किसी के पास कुछ बनाने की शक्ति आ जाए, तो यहां सोचने वाली बात है, वह एक ही वस्तु क्यों बनाएगा। दुनिया में ऐसे बहुत हैं ,जिन्हें अनेकों प्रकार की वस्तुओं की आवश्यकता है।
चमत्कार दिखाने वाले जो मनोरंजन करते हैं ,वह तो संभवत अपनी जगह पर ठीक है। परंतु जो चमत्कार के सहारे एक सरल सीधे-साधे व्यक्ति को भावनाओं के जाल में फांसते हैं। वे आगे चलकर प्रकृति के कोप का भाजन बनते हैं।
कोई भी दूषित प्रकार का भावना दूसरे का तो निश्चित तौर पर नुकसान करता है, साथ में वैसा भावना स्वयं को ज्यादा नुकसान करने वाला है। इसलिए वेदांत कहता है अपनें भावना को कभी भी किसी भी प्रकार दूषित न होने दें। जादू चमत्कार यह सब एक प्रकार से भ्रम है। सदैव ऐसे चमत्कारों से और भ्रम युक्त विचारों से दूर रहना चाहिए।