एक राजकुमार आया था- एकादश रामायण-01

एक राजकुमार आया था
पिता के अनेक यतन से था।
आते ही वह सबके मन को भाया था
ब्रम्ह स्वयं राम रुप में आया था
और वह अकेले नहीं अनेंक सेवक तथा
अपनी सदैव की सहयोगीनी एवं जगत माता
महामाया को भी साथ लाया था

ek raajakumaar aaya tha- ekaadash raamaayan-01


एक राजकुमार आया था
स्वयं ब्रम्ह होकर मनुष्य का जीवन जीने आया था
वह मनुष्य जीवन जीते हूए दुष्टो का नाश करने आया था
वह स्वयं दर्द झेलकर भी राम राज्य का उपहार देने आया था
वह राम अपने माता-पिता के तपस्या का फल देने आया था
वह राम गुरु वशिष्ठ के शिक्षा को सार्थक करने आया था
एक राजकुमार आया था समस्त जगत के मन‌को भाया था

एक राजकुमार आया था
राक्षस ताड़का- सुबाहु को माड़कर
वह श्री विश्वामित्र का यज्ञ पूर्ण कराने आया था
एक अहिल्या थी बेचारी, ऋषि गौतम का श्राप था
पत्थर बन था वर्षों से इन्तजार, उसी रास्ते वह आया था
राजकुमार ने किया उद्धार , अहिल्या हो गई बेड़ा पार
जनकपुर में सीता स्वयंवर का दिन आया था
वह राम अपने गुरु विश्वामित्र भाई लक्ष्मण के साथ
जनक नंदिनी सीता स्वयंवर देखने आया था।

एक राजकुमार आया था
जनकपुर में वर्षों बाद महान उत्सव आया था
जनक ने देश-विदेश से समस्त राजाओं को बुलाया था
स्वयंवर उत्सव शुरू हुआ,  राजा ने क्या खूब महल बनवाया था
स्वयंवर में एक एक राजा का कौशल शुरू हुआ
फिर भी शिव धनुष सब पर भारी था
विश्व प्रसिद्ध सब हार गए, अंहकार सब टूट गये
राजा का धैर्य छूट गये, क्या कोई नहीं बलशाली जगत में
श्री जनक समस्त सभा के बीच बोल गए

एक राजकुमार आया था
उस राजकुमार राम के साथ भाई लक्ष्मण भी साथ आया था
सुना बलशाली शून्य धरती!  वह राजा को रोक कर बतलाया था
राजा क्या भुल गए, सभा में दशरथ वीर भी आया है
जिससे ऐसा लगता है गुरुदेव श्री विश्वामित्र ने यहां बैठे
समस्त अहंकारीयो का मान मर्दन करने लाया है।
क्या भुल गए रघुवंशी श्री राम भी यहां आया है।


एक राजकुमार आया था
गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से वह राम चला शिव धनुष की ओर
सूर्य का तेज लिए जब चला वह राम धनुष की ओर
सारे बीर बलशाली हंस पड़े देख राम की ओर
उन्हें क्या पता था वह राम अहंकार मर्दन करने आया है
सभा में जिसे सब बलशाली राजा सुकुमार समझ रहे थे
वह राम देखते हीं देखते वज्र के समान शिव धनुष को तोड़ गया।
सभा में बैठे एक से एक बलशाली के बल को वह राम पीछे छोड़ गया।


एक राजकुमार आया था
राम सिया की जोड़ी देख देवता भी फूल बरसाये थे
जनकपुर वासी हर्षित हो मंगल गीत गाएं थे।
शिव धनुष टूट ध्वनि सुन भगवान परशुराम दौड़ आए थे।
श्री परशुराम को देख समस्त राजाओं को यमराज नजर आए थे।
परशुराम की वीरता जगत में प्रसिद्ध , 21 बार क्षत्रियों को  पृथ्वी से नष्ट कर अपनी ख्याति बढाये।
राज्यसभा में सब भीगी बिल्ली बन मूरत बन आए थे
धनूही टूट पर इतना रोष , लक्ष्मण हर्षित बोल पड़े।
लागे तुझे प्राणों से प्रेम नहीं , वीर परशुराम बोल पड़े।


एक राजकुमार आया था
दोषी भाई नहीं, सब दोस्त हमारा है
जो कुछ दंड दूजै को होवे वह दंड मुझे को दीजै
मेरे से बड़ा आपका काम है मेरे से बड़ा आपका नाम है
मैं तो सिर्फ राम कहलाता हूं आपका परशुराम नाम है।
हे देवऋषि! आप हमारे अभिभावक! आपके सम्मान में हमारा मान है।
रहस्य वाणी सुन श्री परशुराम के मन में विचार आया था।
मन को लगे यह नर नहीं नारायण है ,
जरूर परम शक्ति ईश्वर हीं नर लीला करने आया है।

 

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