जहाँ सुमति तहँ संपति नाना।
जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥
श्री गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं : जहाँ सुबुद्धि है, वहाँ नाना प्रकार की संपदाएँ अर्थात सुख और समृद्धि रहती हैं और जहाँ कुबुद्धि है वहाँ विभिन्न प्रकार की विपत्ति-दुःख का वाश होता है।
यह विचार प्रचलित है – जब व्यक्ति को धन ऐश्वर्य आता है तो उसे संभालने की शक्ति भी चाहिए होती है। जिसके पास इन्हें संभालने की काबिलियत नहीं होता उनके पास से यह दोनों चीज बहुत जल्दी चला जाता है। इसका अर्थ यह निकलता है की सुख समृद्धि वही रूकता है जो उसके लायक होता है।
श्री रामचरितमानस में इसे दूसरे तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यह कह सकते हैं कि वास्तविकता यही है। जहां सुबुद्धि है वहीं पर नाना प्रकार की संपदाएं रहता है अथवा आता है। समाज में यह भी प्रचलित है किसी के पास बहुत संपदा हो और उसकी बुद्धि दूषित हो तो वैसा व्यक्ति अपना संपदा खो बैठता है।
जो मंगल का विचार नहीं करेगा वह मंगल युक्त कार्य भी नहीं कर सकता। जो मंगल युक्त कार्य नहीं करेगा उसे मंगल युक्त फल कैसे प्राप्त हो सकता है। श्री रामचरितमानस का यह चौपाई कहने के लिए कोई आश्चर्य नहीं है। यह संपूर्ण जगत जानता है सुमति के साथ सुख ,ऐश्वर्या, शांति सब कुछ होता है। कुमति के साथ तो दुःख ,दर्द और विपत्ति सब कुछ होता है।
ऐसे तुलसी बाबा जी के विचार का अनुसरण करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए लाभदायक है। क्योंकि पूरी दुनिया लाभ का ही तो अनुसरण करती है। यदि कोई ज्ञान फायदा के लिए हो तो उसे अपने में हर्ज क्या है। रामचरितमानस कहता है अच्छी बुद्धि से सदैव मंगल का चिंतन कर। मंगल का चिंतन! अर्थात अच्छी सोचवाली अच्छी बुद्धि को बढ़ाएगा।
मनुष्य का दिमाग हजारों कंप्यूटरों से भी बड़ा है। बशर्ते कि व्यक्ति ने अपने दिमाग में किस प्रकार का डाटा स्टोर कर रखा है। किसी ने यदि गेम डाल कर रखा है। तो वहां सिर्फ खेलने के कार्य में उपयोग होगा। किसी ने फिल्म डाल रखा है तो वह सिर्फ मनोरंजन के दृष्टि से उपयोग होगा। किसी ने जनरल नॉलेज डाल रखा है तो वह जीवन के प्रत्येक मोड़ पर उपयोगी होगा।
मनुष्य अपने दिमाग रूपी कंप्यूटर में सुमति से संबंधित अच्छे ज्ञान को अधिक मात्रा में डाल रखा है। तो वह निश्चित रूप से सुमति से संबंधित अच्छे कार्य करेगा और अच्छा फल पाएगा। किसी ने अभी कुमति से संबंधित अधूरे ज्ञान को अधिक मात्रा में डाल रखा है। ऐसा व्यक्ति यदि अच्छा करना चाहेगा भी तो उससे अच्छा कार्य नहीं होगा। कुबुद्धि एक बार नहीं बार-बार विपत्तियों को आमंत्रण देता है।
इसीलिए हमारे महात्माओं ने बार-बार कहा है जहां सुमति है वहां संपत्ति है और जहां कुमति है वहां विपत्ति है। इसलिए सदैव सुमति अर्थात अच्छे बुद्धि का सहारा लेना चाहिए। अच्छे बुद्धि का अनुसरण करना चाहिए। अच्छा बुद्धि वर्तमान को अच्छा बनाए ना बनाएं परंतु भविष्य को उत्तम बनाने का सामर्थ्य रखता है।