रिटायरमेंट के बाद का बिजनेस!

मस्तिष्क को खाली छोड़ अपने को पंगु नहीं बनाना है,
सदैव लगे रहना है कर्म में, किसी का आश्रित नहीं बनना है।

Retirement ke bad ka business


रिटायरमेंट के बाद क्या करें इस उलझन में व्यक्ति विचार करते रहता है और समय निकल जाता। रिटायरमेंट के बाद इंसान का एक उम्र होता है। जब उम्र का एक निश्चित बंधन हो तो उसके लिए कार्य करने के क्षेत्र में भी एक बंधन हो जाता है। कितने क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं।
यूट्यूब पर अथवा अन्य सोशल मीडिया पर अनेंक प्रकार के बहुत सारे बिज़नेस करने के सुझाव मिलते हैं।

क्या करें और ना करें और यदि कर दिए तो आगे क्या? पहले अनेक प्रकार के कर्म में लोग छोटा बड़ा कर्म बहुत कुछ देखा करते थे। अब यहां का बात खत्म हो गई। कार्य कोई भी हो छोटा बड़ा नहीं होता वह कितना खूबसूरती से और अच्छे से किया जाए यह निर्भर करता है। आप कुछ भी कर सकते हैं और वह करने के लिए कोई बंधन आपको रोक भी नहीं सकता।

पदम कुछ भी करने से पहले यह सूचना अत्यंत आवश्यक है की करने के बाद यदि आपके मन मुताबिक फल नहीं होता है तो क्या? क्योंकि रिटायरमेंट के बाद आप रोज नए-नए काम की शुरुआत नहीं कर सकते। रिटायरमेंट के बाद आप अपने प्रोफेशन को भी बार-बार नहीं बदल सकते। क्योंकि रिटायरमेंट के बाद प्रोफेशन बदलने के बजाय हमें उस बिजनेस के प्रति अपने आप को बदलना अत्यता आवश्यक है।

मैं अनगिनत घरेलू बिजनेस बता सकता हूं जिसे आप स्वयं भी बहुत करीब से देख रहे होंगे। मैंने पहले ही कहा आप मुनाफा की बात मत सोचो। आप रिटायरमेंट के बाद कोई भी बिजनेस करते हो आप बिजनेस शुरुआत करने के बाद उसको अंत समय तक कैसे चलाते रहोगे उसकी बात सोचो। आपके जाने के बाद वह कैसे चलेगा यह भी मत सोचो। क्योंकि रिटायरमेंट के बाद आपको बहुत ज्यादा पूंजी नहीं लगानी है।

रिटायरमेंट के बाद आपको अपने विचारों एक तरफ लगाना है। क्योंकि आपके विचार आपके अस्थिर बैठने नहीं देंगे। मानव शरीर के अंदर मस्तिष्क सब कुछ करने पर मजबूर करता है। अपने मस्तिष्क को खाली मत छोड़ो नहीं तो वह आपको पागल बना देगा। यदि समय रहते अपने मस्तिष्क को कहीं ना कहीं नहीं लगाया तो यहां मस्तिष्क आपको अंत समय में धोखा दे देगा।

समाज में एक कहावत आपने अनेक बार सुनी होगी। “जीवन में आश है सभी श्वास है!”
जिस दिन जीवन जीने की आपकी उम्मीद खत्म हो गई उस दिन के बाद आप सोच लो कि आपकी जीवन की वैलिडिटी भी खत्म हो गई। इसलिए मैं कहता हूं की ऐसी स्थिति कभी उत्पन्न न होने दें। अपने मस्तिष्क को किसी के भरोसे छोड़ना ठीक नहीं। आप अपने आप को यह मत मानो कि मैं कुछ नहीं जानता हूं। आप जितना जानते हो और जितना कर सकते हो आप सिर्फ वही करने की सोचो।

आप बड़े बिजनेस की मत सोचो छोटे-छोटे बिजनेस के बारे में सोचो। आप यदि वृद्धावस्था के समय बहुत ज्यादा ऊंचा उड़ने की सोचेंगे तो आपके पंख साथ नहीं देंगे। यदि आप ज्यादा उड़ भी गए और पंख ने धोखा दे दिया तो फिर आपकी दशा खराब हो सकती है। इसलिए मैं कहता हूं कि आप अपनी एक सीमा निश्चित करो।

आप अपने आनंद की बात भूल जाओ। अब तक जीवन पर्यंत आपको आनंद से तृप्ति नहीं हुई है तो अब आगे जाकर आनंद के लिए और कौन से झंडे गाड़ लोगे। अब तो जीवन को ऐसे लेकर चलना है जो जो रोज नित्य निरंतर बराबर चल सके। यदि आपके अंदर यह विश्वास है कि आप अपने बच्चे अथवा बच्चों के बच्चे की सेवा करने से आपकी दिनचर्या निकल जाएगी तो आप किसी की ना सुनो। आप सब की बात अनसुना करके उनकी सेवा में लगे रहो।

परंतु फिर एक बात कहूंगा आप यह कभी ना सोचो कि वह आपकी सेवा करने वाले हैं। क्योंकि यह दुनिया मतलबी दुनिया है। दुनिया को आपसे जब तक स्वार्थ सिद्ध होता रहेगा तब तक वे आपको हंस के झेलते रहेंगे। जिस दिन से आप उनके लिए फायदेमंद नहीं रहोगे उसी दिन से आप बोझ बन जाओगे।

क्या सोचते हैं यह बातें कुछ कड़वा मालूम पड़ता है ना। परंतु कोई कहानी अथवकल्पना नहीं है। यह जीवन और आज के समाज की सच्चाई है। कितने प्रकार के बिजनेस आप कर सकते हो आगे चलकर हम वह भी सुझाव देने की कोशिश करेंगे। लेकिन मैं कहता हूं पहले आप सोचो आप क्या कर सकते हो। बस! मैं इतना कहूंगा आप आराम करने की कभी ना सोचो। जिस दिन से आप आराम करने बैठ जाओगे उसी दिन से आपके जीवन हराम होना शुरू हो जाएगा। अर्थात इस दिन से आपकी शांति सदैव के लिए भंग हो जाएगी।

“श्रीमद्भागवत गीता स्वयं यही बात करती है कि कर्म से तुम भाग नहीं सकते और जब तुम कर्म से भाग नहीं सकते तो भागने के बारे में सोते क्यों हो?”

यह मत भुलो  कि तुम जब तक जिओगे जीवन का युद्ध तुम्हें लड़ना पड़ेगा। तुम क्या चाहते हो जीवन का युद्ध तकलीफ से और बहुत दुःख के साथ लड़ते रहो ? नहीं! मैं तुम्हें कहता हूं अंत समय तक अपने जीवन के युद्ध को हंस कर और आनंद से लड़ो ,पूरी शक्ति के साथ लड़ो। मैं बार-बार करता हूं तुम्हें कोई शरीर से साथ दे सकता है परंतु तुम्हारे विचारों से तुम्हारे अपने मस्तिष्क को कोई सहयोग नहीं करेगा। कोई करेगा तो भी तुम्हें ज्यादा समझ में नहीं आएगा।

जीवन के आप किसी भी पड़ाव में हो अपने मन मस्तिष्क और शरीर को शिथिल ना होने दो। यह भी आप मत सोचो कि दस साल, पांच साल या बीस साल जीने वाले हो। जितना मजबूत परिस्थितियों से लड़ने का मस्तिष्क होगा आप और उतना अधिक जीवन जी सकते हो। अपने मस्तिष्क को एक जगह लगाने की सोचो।

रिटायरमेंट के बाद आप कोई भी बिजनेस कर सकते हो अपने मन मुताबिक। यदि आपके पास पैसा है तो आपको पैसे की जरूरत नहीं है। लेकिन वह पैसा आपके मस्तिष्क को कहीं लगाए रखने का साधन बन सकता है। आपका मस्तिष्क कहीं भी लगा रहेगा तो आप स्वस्थ भी रहोगे। आनंदित भी रहोगे और अंत समय तक समाज तथा अपनों के लिए कुछ करते भी रहोगे।

अपने जीवन में एक ही बात सोचो और विचारों।
“रिटायरमेंट के बाद रुकना नहीं है,
रिटायरमेंट के बाद आलस छोड़ थकना नहीं है।
मस्तिष्क को खाली छोड़ अपने को पंगु नहीं बनाना है,
सदैव लगे रहना है कर्म में, किसी का आश्रित नहीं बनना है।”

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