“रिटायरमेंट अंत नहीं नये अध्याय की शुरुआत है क्योंकि,
रिटायरमेंट के बाद भी कर्म का विचार है तो हीं जीवन है!”

रिटायरमेंट जीवन कर्म का अंत नहीं एक नए जीवन की शुरुआत है। मित्रों आराम किसी अच्छा नहीं लगता। सुख किसको प्यारा नहीं। आराम सभीं करना चाहते और सबको सुख प्यारा भी है। वास्तव में रिटायरमेंट क्या होता है इसका वास्तविक उत्तर तो रिटायरमेंट किया हुआ व्यक्ति समझता है? इंसान दुःख के दर्द को निरंतर कम करने की कोशिश करता है और आगे पता चलता है कि वह धीरे-धीरे बढ़ते जा रहा है।
बचपन में सोचता है बड़ा हो जाऊंगा तो सुख मिलेगा। जब बड़ा होता है तो सोचता है जब स्वतंत्र हो जाऊंगा तब सुख मिलेगा। जब स्वतंत्र सोचने लगता है और अपनी इच्छाओं को पूर्ति में समय व्यतीत करता है। आगे सोचता है फलाना मुकाम हासिल करूंगा तो सुख मिलेगा। बेचारा! मुकाम हासिल करते-करते जवान से कब वृद्धावस्था को प्राप्त हो जाता है उसे पता भी नहीं चलता। वह बचपन में अपनी चाहतों का भूखा था। जवानी में भी चाहतों का भूखा रहा और वृद्धावस्था में तो भूख के साथ मायूसियत भी हो भूखा हो जाता है।
यानी कि इस दृष्टि से देखे तो इंसान कभी दुःखों से भाग नहीं सकता। वह किसी भी उम्र के पड़ाव में हो दुःख सदैव उसका पीछा करने वाला है। इंसान पूरी उम्र सुख के पीछे पीछे-पीछे चलता है और उसे पता भी नहीं चलता कि दुःख भी उसके पीछे-पीछे चलते हुए आ रहा है। जब जीवन में नौकरी के आधे साल गुजर जाते हैं तो वह अपने रिटायरमेंट की बात सोचने लगता है।
सोचता है कि रिटायरमेंट के बाद तो घर में आराम करूंगा फिर कोई काम नहीं होगा, कोई बंधन नहीं होगा। रिटायरमेंट के बाद यूं रोज का ऑफिस आना जाना इन सब परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा। इस संसार में अथवा समाज में जो हमारा परिवार है वह सबसे अच्छा है और सभ्य है। जब रिटायरमेंट प्राप्त करूंगा तो उसके बाद घर में सिर्फ सुख ही सुख होगा दुःख तो होगा हीं नहीं।

रिटायरमेंट से पहले कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जो पहले से ही दुःखी है। जिसके घर में सुख नहीं है। वैसा व्यक्ति तो अपने रिटायरमेंट से डरता है। परंतु जिसका जीवन आनंद में गुजरते जाता है वह रिटायरमेंट के बाद और ज्यादा आनंद की कामना करता है।
एक दिन वह घड़ी भी आता है जब व्यक्ति रिटायर्ड होता है। वह जैसे ही नौकरी से रिटायर होता है उसे पता नहीं होता है उसके परिवार वाले भी उसको रिटायर कर देते हैं। जीस अपने परिवार को सबसे सभ्य मानता था अब वह ऐसा मानता है कि हमारा परिवार भी सबके जैसा ही आम परिवार है। उसके अपने परिवार वाले हीं उसे बार-बार एहसास दिलाते हैं कि तुम अब रिटायर हो चुके हो। तुम अब खामोश रहो! तुम तो बाहर वाले हो इस घर में तो ऐसा हीं चलता है।
बेचारा रिटायर्ड क्या करेगा? यदि उसके हाथ अभी भी कुछ बचा हुआ रहता है तो वह अपने सोच का इस्तेमाल करता है। यदि उसके घर परिवार वाले ने अब तक उसका शक्ति सब कुछ खत्म कर दिया है तो यकीन करो या तो वह जल्द खत्म हो जाएगा या हो चुका होगा।
यहां सबसे खास विषय है इस लेख का
“इंसान ऐसे ही नहीं जीता है उसका विश्वास उसे जीलाता है और और जब उसका विश्वास टूटता है तो वह समय से पहले ही खत्म हो जाता है।”
जिसने समय को नहीं देखा है वह इस बात को यकीन नहीं करेगा परंतु मैं सबके साथ आना है। इसलिए यहां लेखक कहता है रिटायरमेंट को अंत न मानो वह जीवन का एक नई शुरुआत है। कहते हैं समय बदलता है और आज का समय यही कहता है रिटायरमेंट के बाद घर में बैठने की कल्पना भी मत करो। यदि एक बार बैठ गए तो फिर खड़े नहीं हो पाओगे। तुम यदि खड़ा होना भी चाहोगे तो तुम्हारे अपने खड़े होने नहीं देंगे।
अपने रिटायरमेंट के दूसरे दिन से अपने जीवन का नया अध्याय लिखने के लिए तैयार रहो। यक़ीन करो! रिटायरमेंट के बाद नया अध्याय लिखने का विश्वास! और बीस साल जीने में मदद करेगा। आज संस्कृति बदल चुका है। आज का परिवार अधिकांश वृद्ध व्यक्ति को अपने लिए बोझ समझता है। जिसने पूरा उम्र कर्म किया है वह अंत समय में बिना कर्म किए कैसे बैठ सकता है।
इसलिए मैं कहता हूं कि रिटायरमेंट के बाद जीवन में नए अध्याय की शुरुआत करने का एक अच्छा समय है। क्योंकि उसके बाद कमाने का लक्ष्य नहीं होगा करने का लक्ष्य होगा। जब तक करते रहोगे तब तक जीते रहोगे। यह दुनिया सिर्फ अपने लिए सोचती है आपके लिए कोई नहीं सोचता। यकीन ना हो तो परीक्षा लेकर देख लेना। लेकिन मैं कहता हूं परीक्षा क्या लोगे समय इंसान का रोज परीक्षाएं लिया करता है।
रिटायरमेंट के बाद क्या करना है। अपने आप को निकम्मा तो बिल्कुल ना समझो। आप अपने से अधिक उम्र वाले रोज किसी ने किसी कार्य में लगे हुए व्यक्तियों को करीब से देख सकते हैं। उसके ऊपर अत्यंत गहराई से विचार कर सकते हैं। ध्यान रहे आपका लक्ष्य पैसे कमाना नहीं है आपका लक्ष्य अपने विचारों को एक जगह लगाना है। क्योंकि रिटायरमेंट के बाद आपके विचारों पर जो प्रेशर आने वाला है। यदि आपका विचार कहीं और लगा ना रहा तो आप उस प्रेशर को झेल नहीं पाओगे।
कुछ भी करो परंतु करो। घर में अपने बच्चों का जूता पॉलिश करो। बच्चों के बच्चे का जूता पॉलिश करो। मैंने सबसे नीचे की बात कही है। हमेशा कुछ ना कुछ करते रहने की सोचो। यह मत सोचो कि तुम्हारे अपनों के पीछे जो है वह क्या कहेंगे? जो तुम्हारा मजाक उड़ाता है उसको यदि करीब से देखोगे तो तुमसे ज्यादा वह दर्द छुपाए बैठा हुआ है।
मैंने कहा जूता पॉलिश करने के लिए इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ जूता ही पॉलिश करना है। आप जो कर सकते हो करो। और यह भी मान कर चलो कि जब तुम जूता पॉलिश रोज कर सकते हो तो तुम और भी बहुत सारे कामों को कर सकते हो। आप कहीं नौकरी भी कर सकते हो। आप छोटा-मोटा रोजगार कर सकते हो। बड़े-बड़े प्राइवेट सेक्टर में पुराने ऑफिस में वृद्ध व्यक्ति कार्य करते हुए मिल जाएंगे।
यह कर रहे हैं इसलिए कि वह शुरू से करते आए हैं। हो सकता है आपको एडजस्टमेंट होने में समय लगे। यह मत सोचो कि आपके बारे में कोई और विचार कर रहा है अथवा करेगा। आपको अपने बारे में स्वयं विचार करना होगा। यदि कुछ करने के लिए नहीं है तो बनाओ रास्ता कुछ करने के लिए। मैं फिर कहूंगा रिटायरमेंट के बाद नित्य निरंतर कर्म है तो हीं जीवन है, और आनंदमय जीवन है।
वेद, आपका सुझाव बहुत व्यावहारिक है कि लक्ष्य पैसा कमाना नहीं, बल्कि विचारों को कहीं और लगाना है, ताकि रिटायरमेंट के बाद आने वाले मानसिक दबाव (प्रेशर) को झेला जा सके। चाहे वह कोई भी छोटा काम हो, ‘करते रहना’ ही जीवन है।
मेरे पिताजी भी रिटायरमेंट के बाद खाली बैठने को तैयार नहीं हैं। वह आज भी किसी न किसी काम में लगे रहते हैं, और मैं इसे उनकी खुशी और स्वास्थ्य का रहस्य मानती हूँ।
आपकी यह बात सच है—नया अध्याय लिखने का विश्वास ही जीवन को 20 साल और जीने में मदद करता है! बहुत ही प्रेरणादायक लेख। ✨
नमस्कार! 🙏
आपकी टिप्पणी पढ़कर बहुत अच्छा लगा। आपने बिल्कुल सही कहा कि ‘करते रहना ही जीवन है’- यही सक्रियता और उद्देश्य का भाव रिटायरमेंट के बाद भी जीवन को ऊर्जा और संतुलन देता है।
आपके पिताजी का जीवन-दृष्टिकोण वास्तव में प्रेरणास्पद है। उनका किसी न किसी काम में लगे रहना न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण है।
आपके विचार और अनुभव इस लेख की भावना को और भी प्रगाढ़ करते हैं। इस संवाद में जुड़ने के लिए धन्यवाद – इसी तरह हम सब मिलकर एक-दूसरे को प्रेरित करते रहें। 🙏
शुभकामनाओं सहित,
वेदांत
ज़रूर वेदांत!
ऐसे ही एक दूसरे को प्रेरित करते रहेंगे …😇🙏
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