Dharm Vichar

वेद दर्शन

ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं……वेद-वेदांत दर्शन समुंद्र के जैसा विशाल है।  संस्कृत भारत दर्शन का प्राचीनतम भाषा है। संस्कृत आज समाज का मुख्य भाषा नहीं है, जिसके वजह से वेदों के शब्दों को आज की प्रचलित भाषा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। समाज में सनातन समाज के कल्याण के लिए एवं बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने […]

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वास्तविक विरासत

प्राचीन इतिहास से लेकर, आज तक भारत में अनेकों महामानव हुए । उन महामानव को लेकर देश हीं में अनेक पंथ और संप्रदाय हैं। चाहे वह किसी भी जाति धर्म से युक्त व्यक्ति हो, परंतु उनके उद्देश्य तथा क्रियाकलापों में हमेशा से ही सनातन की छवि रहा है। धरती पर अनेक देश है, जहां सिर्फ

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वेद पुराण PDF download

सनातन में सनातन साहित्य का बहुत विशाल भंडार है। एक समय था की वेद पुराण को सुनने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। उसके बाद जब वेद पुराण पर शोध होने लगे उसके बाद वेद पुराण का छपाई करण चालू हो गया। उसके बाद जो भी धर्म आस्था वाले व्यक्ति रहे उनके लिए शास्त्र

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गंगा का उपकार

श्री गंगा जी की महिमा,मां गंगा! श्री गंगा जी के बारे में जितना भी कहा जाए कम होगा। भारतीय सनातन वेद संस्कृति में उपकार का महत्व बहुत बड़ा है। थोड़ा भी यदि कोई कुछ करें तो व्यक्ति उसे ईश्वर के सदृश्य मान लेता है। परमेश्वर को मानने की क्रिया इतनी प्रबल है, भक्त देव दानव

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सनातन पर अंधविश्वास

सनातन धर्म में रोग कहते हुए सूनों तो अफसोस होता है। सनातन अपनें पद्धति तथा विचार में सर्व स्वीकार्य संस्कृति को लेकर सर्वोत्तम है। परधर्मि इस पद्धति को मान देते हो न देते हो,  इसमें कोई आश्चर्य नहीं, सब के अपने विचार हो सकते हैं। यदि हम अपने सनातन पद्धति में करीब से देखें तो

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ईश्वर-मंदिर अंधविश्वास चिंतन

भगवान और मंदिर क्यों चाहिए? सनातन संस्कृति में भगवान और मंदिर का महत्व किसी से छिपा हुआ नहीं है। यह सवाल उठता है,कुछ प्रतिशत लोगों के अविश्वास से। एक सवाल अनेक महत्वपूर्ण सवाल को जन्म देता है, जिसे जानना प्रत्येक सनातन अनुयाई को अवश्य है। “क्या वाकई में भगवान है, और वह भी है! तो

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धर्म का भ्रम

मानव धर्म यह किसके लिए है? मानव धर्म वह धर्म नहीं जो हमें अपने धर्म समूह से मिला है। अपना धर्म समूह हमें अपने लिए धर्म सिखाता है परंतु मानव धर्म संपूर्ण समाज के लिए धर्म सिखाता है। वास्तव में कोई धर्म छोड़ना नहीं है। संसार में यदि धर्म की चर्चा की जाए तो सबसे

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ईश्वर-शक्ति चिंतन

“जिसने ईश्वर को देखा है, वह ईश्वर को व्यक्त नहीं कर सकता। यदि कोई ईश्वर को व्यक्त किया है इसका मतलब उसने ईश्वर को नहीं देखा।” आज तक प्राप्त जानकारी से हमें पता है कि ईश्वर के ऊपर, चिंतन करोड़ों वर्षों से होते रहा है। जिस किसी ने भी उस परम शक्ति ईश्वर से मन

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कहां दिल लगाए बैठे

कहां दिल लगाए बैठे हो, जहां दिल लगाए बैठे हो निश्चित तौर पर वह दिल तोड़ जाएगा। यकीन मानो एक न एक दिन तुम्हें छोड़ जाएगा। इसलिए हमारे महात्माओं ने कहा है ‘मंगल भवन अमंगल हारी’। तुम अपने ईश्वर जो मंगल का घर है,मंगल का महल है, जो समस्त अमंगलों को हरने वाला है। उस

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भक्त बनने का ढोंग

दुनिया में मशहूर हो , पूजा पाठ करने वाला व्यक्ति है। सही बात है होना भी चाहिए और करना भी चाहिए। तुम्हारा दिल जानता है तुम भगवान के लिए भगवान के पास कितनी बार जाते हो। अफसोस है तुम जितनी बार जाते हो उतनी बार संसारिक जरूरतों के लिए जाते हो। कौन सा व्रत और

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