दुःख के कारण
जीवन एक निरंतर परिवर्तनशील धारा है, जिसमें सुख और दुःख दोनों प्रवाहमान हैं। जैसे दिन के बाद रात आती है और वर्षा के बाद धूप खिलती है, वैसे ही जीवन में भी सुख के साथ दुःख का आना स्वाभाविक है। परंतु समस्या यह है कि मनुष्य सुख के क्षणों में इतना तल्लीन हो जाता है […]