Kabir Vani

सफल होने में विशेष गुण

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ॥ किसी किसी को धर्य बिल्कुल नहीं होता। हर समय जल्दबाजी करते हैं। कबीर दास जी सुंदर विचार प्रकट करते हैं। वे कहते हैं “रे मन आराम से, धीरे-धीरे सब कुछ होता है। बाग में माली एक पेड़ को सैकड़ो घड़ों से […]

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मन का माला फेर

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।कर का मन का डार दें, मन का मनका फेर ॥ श्री कबीर जी महाराज यहां कितनी सुंदर विचार प्रकट करते हैं। वे कहते हैं – “देखो माला फेरते हुए बरसों हो गए । परंतु अफसोस फिर भी मन का विचार नहीं बदला। हाथ का माल छोड़ दो ,

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माया और मन की माया

माया मुई न मन मुवा, मरि-मरि गया सरीर। कबीर जी महाराज अपने विचार प्रकट करते हुए कहते हैं – मनुष्य का न तो मन मरता है और न ही उसकी इच्छाएँ समाप्त होती हैं। केवल उसका शरीर नश्वर है और वही मरता है। जीव जब तक मन और माया के मोह में फंसा रहता है,

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पोथी का ज्ञान

पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुवा, पंडित   भया   न   कोइ। श्री कबीर दास जी महाराज कहते हैं, पोथी पढ़कर अनेंक लोग इस दुनिया से चले गए फिर भी पोथी पढ़ कर कोई ज्ञानी नहीं हुआ।तार्किक ज्ञान और आत्मिक ज्ञान में जमीन आसमान का अंतर होता है। तार्किक ज्ञान व्यक्ति को उलझा कर रखता है जबकि आत्मज्ञान व्यक्ति

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