Prem Tatva

वास्तविक प्रेम: अनुभव करें और अपनाएं

प्रेम जीवन का सबसे गहन और पवित्र अनुभव है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वास्तविक प्रेम क्या है और इसे कैसे किया जाए? इस लेख में हम प्रेम की गहराई, उसकी विशेषताएँ और इसे अपने जीवन में अपनाने के तरीके समझेंगे। प्रेम क्या है? प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण या इच्छाओं की पूर्ति नहीं […]

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प्रेम की वास्तविकता

श्री कबीर दास जी को आज संसार में कौन नहीं जानता! संसार की वास्तविकताओं को अपने दोहों के माध्यम से सरलता से प्रस्तुत करने वाले कबीर दास जी भारत के अतुलनीय संतों में गिने जाते हैं। वे लंबे-चौड़े भाषणों की अपेक्षा संक्षेप में, दोहों के माध्यम से, गहनतम सत्य कह देने में विश्वास रखते थे।

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प्रेम का स्वरूप

प्रेम किसी घर में या अपनी जागीर में उपजने वाला तत्व नहीं है। यह कोई ऐसी वस्तु भी नहीं है जिसे बाज़ार में खरीदा या बेचा जा सके। प्रेम का स्वभाव स्वच्छ, स्वतंत्र और सार्वभौमिक होता है। यह न किसी सीमा में बंधता है और न किसी अधिकार से उत्पन्न होता है।दरअसल, प्रेम का जन्म

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प्रेम का लड्ड

जो खाए वह पछताए,जो न खाए वह भी पछताए। कहते हैं, “प्रेम का लड्डू जो खाए वह पछताए।” यह वाक्य जीवन की वास्तविकता को बयां करता है। इंसान की उम्र के साथ दुनिया को देखने का नजरिया लगातार बदलता रहता है। बचपन में दुनिया का रंग-रूप अलग होता है, जवानी में दृष्टि और बदल जाती

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प्रेम, चिंतन और चेतना

क्या बलपूर्वक प्रेम प्राप्त किया जा सकता है? — नहीं, कभी नहीं।प्रेम में यदि समर्पण न हो, तो वह प्रेम नहीं रह जाता। प्रेम में यदि आशा, स्वार्थ या अपेक्षा जुड़ जाए, तो वह भी प्रेम की श्रेणी से बाहर हो जाता है। ऐसा भाव मात्र शारीरिक आकर्षण या सोचा–समझा बौद्धिक आकर्षण हो सकता है,

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पसंद और नापसंद : मानव अनुभव का दर्पण

प्रकृति में हर जीव की अपनी प्रवृत्तियाँ और आवश्यकताएँ होती हैं। चिड़िया को दाना पसंद है, घोड़े को घास और शेर को मांस—यह उनके स्वभाव, शरीररचना और जीवनशैली का प्रतिबिंब है। जैसे-जैसे हम जटिल जीवों की ओर बढ़ते हैं, उनकी आवश्यकताएँ और पसंदें भी जटिल होती जाती हैं। मानव जीवन में तो यह जटिलता और

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