Prerna / Motivation / प्रेरणा

सफलता में सहयोगी

सफलता हर व्यक्ति का सपना होती है, लेकिन यह केवल कठिन परिश्रम का परिणाम नहीं होती। सफलता के लिए सही दिशा, ठोस योजना, सकारात्मक मानसिकता और संसाधनों का समझदारी से उपयोग उतना ही आवश्यक है जितना कि मेहनत। जो व्यक्ति अपने समय और धन का विवेकपूर्ण निवेश करता है, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखता […]

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ब्रह्म-जिज्ञासा एवं ईश्वर चिंतन

परब्रह्म परमेश्वर का चिंतन करने से पहले “ब्रह्म” शब्द के अर्थ और भाव पर विचार करना आवश्यक है।वेद-साहित्य की मूल भाषा संस्कृत है, और यह वह भाषा है जिसमें मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन विचारों ने शब्द पाया।इसलिए ब्रह्म-जिज्ञासा की चर्चा संस्कृत और वैदिक परंपरा को समझे बिना अधूरी है। संस्कृत का महत्व और ज्ञान

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वृद्धावस्था का टॉनिक

वृद्धावस्था का टॉनिक, जो जीवन को जीने का विश्वास देता है, वह परम आवश्यक है। वृद्धावस्था में जब समाज धीरे-धीरे साथ छोड़ने लगता है, तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे सभी अपने-अपने तरीके से पिंड छुड़ाने लगे हों। यद्यपि अनेक लोग दिलासा देने का कार्य करते हैं, कुछ उनमें से विश्वास जगाने का भी प्रयास

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मानवता

मानवता, एक ऐसा शब्द जो सुनते ही मन में करुणा, सहानुभूति, प्रेम और समझ का भाव जगाता है। किंतु प्रश्न यह उठता है कि क्या वास्तव में मानवता वही है, जो हम आज समझते हैं? या यह एक सतत प्रक्रिया है-एक ऐसी सीख, जो मानव को निरंतर अर्जित करनी पड़ती है? धरती के इतिहास की

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भक्त का तकलीफ

परमेश्वर एक माँ की तरह हैं। जिस प्रकार माँ अपने बच्चे से प्रेम करती है और उसके बदले में कुछ नहीं चाहती, उसी प्रकार परमेश्वर भी अपने भक्तों से निस्वार्थ प्रेम करते हैं। यद्यपि परमेश्वर सबके प्रति समान व्यवहार करते हैं, परंतु जो उनका अनन्य भक्त होता है, परमेश्वर उसके साथ माँ की तरह स्नेहपूर्ण

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भरोसे की पहचान

“सामाजिक दुश्मन एक बार के लिए पीछा छोड़ सकता है, परंतु अपना हीं भावना रूपी दुश्मन कभी पीछा नहीं छोड़ने वाला।” कोई हम से प्रेम कैसे करें? यदि विचार करें तो कोई भी व्यक्ति किसी को भी अपने को प्रेम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। नफरत और प्रेम दोनों ही एक सिक्के के

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प्रेम दर्शन – वास्तविक प्रेम चरित्र

“बिना हमारे समर्पण के हम सिर्फ सामने वाले के समर्पण का इच्छा करें, तो यह गलत होगा और ऐसे प्रेम के बदले  फ्रेम हीं मिलेगा ।” प्रेम का रंग और वास्तविक परिभाषा समझने के लिए भी प्रेम चाहिए। प्रेम वहां से शुरू होता है, जहां बुद्धि अपना कार्य छोड़ देता है। इसीलिए इतिहास में अनेक

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दिल की कमान

काश दिल के अंदर दो दिल होता। टूटे हुए दिल के लिए क्या कहें, इस दुनिया में एक दिल ही तो है जो कहते हैं मानता नहीं! दिल को हर समय कुछ न कुछ चाहिए, दोस्तों से तो चाहिए साथ में दुश्मनों से भी चाहिए। एक मशहूर कहावत है ,टूटा हुआ दिल कहता है- काश!

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मानव का यात्रा

सपनें हीं आनंद देते हैं,पर सपनें ही दर्द भी दे जाते हैं,सपनें तो सपने होते हैं ,अधूरी प्यासकुछ पाने की आशा। एक बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से उस बच्चे के अंदर एक आशा का बनना शुरू हो जाता है,” आशा कौन सी आशा!” कुछ पाने की आशा कुछ बनने की आशा। एक

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नारी दर्शन- बहुमूल्य चिंतन

“एक नारी अपने लिए क्या खोजती है ? उसे अपनों से हौसला ,प्रेम  और सम्मान चाहिए। इतिहास गवाह है नारी ही हर जगह प्रेम बांटती आई है‌।” हर बार हर जगह सिर्फ औरत ही क्यों सुने? सामाजिक व्यवस्था में नारी का स्थान कहां है यह सभी को पता है। चर्चा तो बहुत होता है परंतु

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