Prerna / Motivation / प्रेरणा

मां-बाप और आशा

बच्चे माता-पिता के उस बाग के फूल हैं, जिस बाग के सिवा माता-पिता  के पास और कुछ नहीं होता। बहुत ऐसे बच्चे हैं जो अपने माता-पिता के ऊपर ऐसे इल्जाम भी लगाते हैं, कि हम तो अपने मां बाप के रोमांस का फल है। यह कहने वाला निहायत ही महामूर्ख हो सकता है, क्योंकि पर्दे […]

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पारिवारिक सुख-शांति

पारिवारिक सुख-शांति में  आपसी प्रेम बहुत बड़ा अपना रोल अदा करता है । जब परिवार धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है, जब परिवार के व्यक्ति एक उम्र से दूसरे उम्र में प्रवेश करते हैं तो धीरे-धीरे वे एक दूसरे से दूर होते चले जाते हैं। एक समय प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे के लिए जान देने

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विवाह की प्रथा

भारतीय संस्कृति में पहले सिर्फ एक हीं विवाह होता था। कहते हैं सात जन्मों का रिश्ता। आज के समय सात जन्मों का रिश्ता महज एक कहावत बनकर प्रचलित है। कल और आज में मानव जमीन आसमान का अंतर हो गया हो। पहले विवाह के बाद कसमें खाते थे, एक दूसरे का साथ निभाने के लिए

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चमत्कार का भ्रम

प्राचीन भारत में, अथवा संसार के अनेक भाग में, प्राचीन समय से चमत्कार होते रहे हैं। चमत्कार के ऊपर भरोसा करने वाले, कम नहीं। चमत्कार दिखाने वाले के लिए क्या करना है, मैजिक दिखाओ और सामने वाले को खुश करो, यह उनका कला है। कहीं-कहीं मैजिक दिखाकर जनता को लूटने का भी काम होते देखा

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ईश्वर कहां नहीं

ईश्वर कहां नहीं,जगत के कन-कन में भगवान।जिनका गुणगान करते थकते नहीं वेद पुराण।। विज्ञान इस ब्रह्मांड को गुरुत्वाकर्षण के बल पर संचालित होने की बात करता है। परंतु ईश्वर का सत्ता स्वीकार नहीं करना चाहता क्योंकि वह ईश्वर नजर नहीं आता। वेद विज्ञान से पहले से कहता  हुआ आ रहा है , एक चींटी को

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बल और ज्ञान का भ्रम

सत्य को असत्य मानने वाला ज्ञान !ज्ञान नहीं ज्ञान के नाम से भ्रम है। इस धरती पर कितना भी बलशाली व्यक्ति क्यों ना हो। परंतु यदि वह अत्याचार, दुराचार अथवा अहंकार को लेकर समाज में कुछ गलत करता है। वह किसी भी प्रकार से पाप का अथवा दंड का भागी होता है। रावण तक का

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नशा का फ़साना

“नशा अपनों  और परिवार से दूर लेकर जाता है। नशा परिवार में कलह का सबसे बड़ा कारण बनता है।” मित्रों नशा कितना हानिकारक है आपके और आपके परिवार वालों के लिए इससे पूरी दुनिया परिचित है। किसी भी प्रकार का नशा आपके लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। नशा आपके शरीर को भी नुकसान पहुंचता

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दिल की हरकतें

हद से गुजरते, सपनों की दरिया,कभी जन्नत तो कभी आग का दरिया। दिल के पास अपनी जुबान नहीं होती, लेकिन उसकी हरकतें और इशारे बहुत कुछ कह जाते हैं। दिल के तेवर और भावनाएं अक्सर बिना शब्दों के भी समझ में आती हैं। जब किसी की भावनाओं को समझना या उसके साथ एकान्त में संवाद

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औरत-मर्द में विशेष

औरत हो या मर्द सबको होता है दर्द,सिक्के के दो पहलू, दोनों करो गर्व। इसे समझने के लिए सर्वप्रथम औरत और मर्द के गुण को अलग-अलग समझना पड़ेगा। जैसे महिलाओं और पुरुषों दोनों में अनेक गुण होते हैं। महिलाओं की ओर से विशेष रूप से संजीवनी, सहानुभूतिशीलता, और दृढ़ संवेदनशीलता के गुण माने जाते हैं।

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ग़म का साथी

हस्तक्षेप से भरी, हर राह का मोड़,दिल की धड़कन, अपनी हीं राह बनाती। कहते हैं दुःख में अपना साया तक साथ छोड़ने लगता है। सुख में अनेंक साथी मिलते हैं पर दुःख में कोई नहीं। प्रकृति हर पल हस्तक्षेप करती है। जीवन के हर मोड़ पर अवरोध उत्पन्न होता है। फिर भी जीवन पर्यंत दिल

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