Ramayan

उत्तम कर्म उत्तम कर्मफल

होइहि सोइ जो राम रचि राखा।को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ यहां श्री गोस्वामी तुलसी बाबा अपने विचार में रहते हैं : “जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा। तर्क करके कौन शाखा (विस्तार) बढ़ावे।” इस चौपाई के ऊपर अनेक लोगों का अनेकों प्रकार का मत है। परंतु यहां मेरा कहना है इसका क्या […]

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ईश्वर नाम चिंतन

उलटा नाम जपत जग जाना,बालमीकि भये ब्रह्म समाना।। श्री गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरितमानस में कहते हैं।”यह संपूर्ण जगत को पता है, उल्टा नाम जप कर भी वाल्मीकि जी ब्रह्म के समान हो गए।” वेदांत कहता है परम शक्ति ब्रह्म को किसी ने नहीं देखा। जिसने देखा वह शब्दों के जरिए व्यक्त नहीं कर सकता। वेदांत

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कृपा करहिं सब कोई

जा पर कृपा राम की होई।ता पर कृपा करहिं सब कोई॥ तुलसी बाबा अपने विचार से ईश्वर की कृपा का सरल शब्दों में प्रस्तुति करते हैं। जिस जीव अथवा व्यक्ति पर परम शक्ति श्री राम की कृपा रहता है उस पर सभीं प्राकृतिक तत्व कृपा करते।  यह सब जानते हैं ,संसार की समस्त शक्तियां परम

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शांति के लिए ईश्वर

हरि अनंत हरि कथा अनंता।कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥ हरि अर्थात दुःख को हरने वाले ईश्वर! जिस प्रकार हरि के रूप अनन्त है उसी प्रकार हरि की कथा भी अनंत है। परम शक्ति ईश्वर के बारे में जो कुछ भी कहा जाए वह सब हरि कथा है। दुःखों का निवारण करने वाले भक्त अपनें भगवान

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कृपा के लिए प्रार्थना

दीन दयाल बिरिदु संभारी।हरहु नाथ मम संकट भारी॥ अपने ईश्वर को खुश तथा प्रसन्न करने हेतु मानस में श्री तुलसी बाबा कहते हैं। दीनों और दुखियों के ऊपर स्वभाव से कतरूणा तथा कृपा करने वाले,  हे ईश्वर!  मेरे बहुत भारी संकट का निवारण करे। जिस प्रकार व्यक्ति ईश्वर के रूप का अपने अनुसार से चुनाव

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दिल में ईश्वर के लिए जगह

जिनके कपट, दम्भ नहिं माया।तिनके ह्रदय बसहु रघुराया॥ तुलसी बाबा कहते हैं जिनके अंदर पहले से कपट, दंभ और माया का निवास है उनके अंदर ईश्वर का वास नहीं होता। यदि हृदय में ईश्वर का वास कराना हो तो पहले इन सब तत्वों का त्याग आवश्यक है। घर में ईश्वर को बुलाने के लिए बहुत

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