ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
विश्व में भारत अपनें उत्तम विचारों को लेकर विशेष कर जाना जाता है। यहां के विचार का आधार भारत की प्राचीन संस्कृति है और वह संस्कृति वेद के ऊपर आधारित है। श्री वेद का महामंत्र है, गायत्री मंत्र जो अपने वेद के मूल आधार और सिद्धांत को प्रस्तुत करता है। वेद भारतीय विचारधारा को वास्तविक रूप से प्रस्तुत करता है।
श्री गायत्री अपने मंत्र के माध्यम से कहती हैं-
“हम उस प्राण स्वरूप ईश्वर का ध्यान करते हैं, जिसने इस संसार को उत्पन्न किया है, जो परम पूजनीय है, जो ज्ञान का भंडार है, जो पाप तथा अज्ञानता दूर करने वाला हैं, वह हमें प्रकाश दिखाए और सत्य पथ पर अग्रसर करें।”
यह मंत्र अपने सिद्धांतों से सिद्ध करता है की वेदांत किसी अंधेरे में नहीं है। इस मंत्र से किसी जाति अथवा समूह का संबंध नहीं है, इस मंत्र का संबंध संपूर्ण मानव है। मानव के अंदर स्थित प्राण उस ईश्वर का स्वरूप है।
जगत में जीवन महत्वपूर्ण है यह कौन नहीं जानता। क्या कोई ऐसा भी होगा संसार में जो अपने प्राण को महत्व न दें। जीस प्राण शक्ति से संपूर्ण जगत चलायमान है उस प्राण के निर्माता की महानता पूर्ण रूप से कहा नहीं जा सकता। उसी प्राण स्वरूप ईश्वर के करीब जाने के लिए गायत्री मंत्र सबसे बड़ा माध्यम है और उस ईश्वर पास जाने के बाद गायत्री मंत्र हीं सबसे बड़ा प्रार्थना।