R. Sevak

Writer, Vicharak

चिड़िया और इंसान के सपनों का संसार

प्रकृति की शांत सुबह थी। एक छोटी-सी चिड़िया पेड़ की डाल पर बैठी थी। हवा के हल्के झोंके उसके पंखों को सहला रहे थे, पर उसके मन में एक गहरी इच्छा उठ रही थी—चिड़िया चल पड़ती है खाने को,बेचारी चिड़िया क्या करें खोजबीन कर रही है दाने को।जैसे तैसे पेट भर चिड़िया आ गई वापस […]

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गरुड़ पुराण : जीवन का दर्शन

सनातन धर्म के विशाल साहित्य में अनेक पुराण अपनी-अपनी विशेषताओं के कारण पूजनीय माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है गरुड़ पुराण, जिसे अनेक जन पितृकर्म के संदर्भ में ही जानते हैं; परन्तु वस्तुतः यह पुराण महापुराणों की श्रेणी में एक अद्भुत ग्रंथ है, जो मनुष्य के जीवन, मृत्यु, चरित्र, कर्म, ज्ञान एवं आध्यात्मिक

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वास्तविक प्रेम: अनुभव करें और अपनाएं

प्रेम जीवन का सबसे गहन और पवित्र अनुभव है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वास्तविक प्रेम क्या है और इसे कैसे किया जाए? इस लेख में हम प्रेम की गहराई, उसकी विशेषताएँ और इसे अपने जीवन में अपनाने के तरीके समझेंगे। प्रेम क्या है? प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण या इच्छाओं की पूर्ति नहीं

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ऋषिकेश : आध्यात्मिकता का अथाह स्रोत

“ऋषिकेश”—अर्थात् ऋषियों के रहने का विशाल स्थल। यह स्थान प्राचीनकाल से ही हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में एक माना जाता है। देवभूमि उत्तराखंड के चार धामों का प्रवेश द्वार होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शंकर ने समीप के नीलकंठ

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सनातन संस्कृति किस लिए- संदेश

“सनातन” शब्द अपने आप में ही अनादि और अनंत का भाव समेटे हुए है। यदि प्राचीनता की कोई उपमा दी जाए, तो वह सनातन ही है। सनातन धर्म, सनातन पद्धति और सनातन साहित्य—इन सबका नित्य अध्ययन, मनन और उपदेश प्राचीन काल से ही चलते आ रहे हैं। हमारे महान ऋषि-मुनियों ने समय-समय पर सनातन संस्कृति

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सनातन में ईश्वर नहीं थोपे जाते, चुने जाते हैं

सनातन धर्म में रामायण एक अद्वितीय ग्रंथ है, और उसमें वर्णित पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र सर्वोपरि माना जाता है। रामायण केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक चरित्र-प्रधान ग्रंथ है, जो अनेक भाषाओं और टीकाओं में उपलब्ध है। समाज में इस ग्रंथ के साथ-साथ उसमें वर्णित चरित्रों की पूजा भी होती है। फिर भी कुछ लोग

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वृद्धावस्था : जीवन का अनिवार्य सत्य

इस धरती पर एक ऐसा रोग है, जो जन्म लेते ही मनुष्य के साथ चल पड़ता है—वह है वृद्धावस्था, जिसे हम बुढ़ापा भी कहते हैं। यह ऐसा रोग है कि प्राचीन काल से ही इससे लड़ने के अनेक प्रयास किए जाते रहे हैं। आज भी लोग यही सोचते हैं कि क्या करें कि जीवन का

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हमारा वास्तविक मित्र

मित्रता को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि मित्र कौन होता है और मित्र किसे कहते हैं। मित्र के प्रकार अनेक होते हैं, परंतु वेदों में कहा गया है कि वही व्यक्ति मित्र कहलाता है जो हमारे लिए शुभ सोचे, आवश्यकता पड़ने पर साथ दे और मार्गदर्शन करे। वेद में एक प्रसिद्ध श्लोक

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प्रेम की वास्तविकता

श्री कबीर दास जी को आज संसार में कौन नहीं जानता! संसार की वास्तविकताओं को अपने दोहों के माध्यम से सरलता से प्रस्तुत करने वाले कबीर दास जी भारत के अतुलनीय संतों में गिने जाते हैं। वे लंबे-चौड़े भाषणों की अपेक्षा संक्षेप में, दोहों के माध्यम से, गहनतम सत्य कह देने में विश्वास रखते थे।

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प्रेम का स्वरूप

प्रेम किसी घर में या अपनी जागीर में उपजने वाला तत्व नहीं है। यह कोई ऐसी वस्तु भी नहीं है जिसे बाज़ार में खरीदा या बेचा जा सके। प्रेम का स्वभाव स्वच्छ, स्वतंत्र और सार्वभौमिक होता है। यह न किसी सीमा में बंधता है और न किसी अधिकार से उत्पन्न होता है।दरअसल, प्रेम का जन्म

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