R. Sevak

Writer, Vicharak

मन का रणक्षेत्र: सुमति–कुमति और सुख–दुःख का सत्य

वास्तव में शरीर के भीतर ही इंसान और शैतान दोनों बसे होते हैं। जहाँ इंसान का जिक्र होता है, वहीं शैतान का भी उल्लेख होता है। किसी व्यक्ति के अंदर इंसानियत है तो वह इंसान है, और यदि उसके भीतर शैतानीयत है तो वह शैतान है। शैतान कहीं बाहर नहीं, बल्कि शरीर के अंदर ही […]

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Sanatan System and Character Worship

The foundation of every relationship in the world rests on character. Whether in family or society, respect is bestowed upon those whose conduct is strong, truthful, and dignified. Husband and wife value each other based on character, parents evaluate their son or daughter based on their conduct, and even in society at large, a person’s

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परिश्रम की मंजिल

हर इंसान की मुस्कान के पीछे एक कहानी छिपी होती है। कोई भी ऐसा नहीं जिसके हृदय में दर्द न हो, जिसकी आँखों ने कभी आँसू न देखे हों, या जिसका मन कभी थका न हो। हाँ, हर किसी के जीवन में कोई-न-कोई कसक, कोई संघर्ष, कोई अधूरा सपना होता है। लेकिन यही संघर्ष हमें

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सफलता में सहयोगी

सफलता हर व्यक्ति का सपना होती है, लेकिन यह केवल कठिन परिश्रम का परिणाम नहीं होती। सफलता के लिए सही दिशा, ठोस योजना, सकारात्मक मानसिकता और संसाधनों का समझदारी से उपयोग उतना ही आवश्यक है जितना कि मेहनत। जो व्यक्ति अपने समय और धन का विवेकपूर्ण निवेश करता है, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखता

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महाभारत-भारतीय संस्कृति का महासाहित्य

भारत का इतिहास और सनातन पद्धति अत्यंत विविध और गहरे अर्थों से भरे हुए हैं। यहां के धर्म ग्रंथों का अद्वितीय समूह केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू को समझने, जीने और संघर्ष करने की एक अमूल्य धरोहर है। इनमें वेद, उपनिषद, पुराण, गीता, रामायण, महाभारत, रामचरितमानस, और अनेकों महापुरुषों

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मृत्यु के बाद

“मृत्यु अंत नहीं, एक नई यात्रा की शुरुआत है।” वास्तविकता सदैव वास्तविक रहती है। किसी के कहने या सोचने से सत्य नहीं बदलता। प्राचीन इतिहास में अनेक महान आत्माएँ हुईं जिन्होंने मृत्यु के बाद के अनुभवों का वर्णन किया। सभी का दृष्टिकोण अलग था — किसी ने इसे आत्मा की यात्रा कहा, तो किसी ने

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भारत – सोने की चिड़िया और सनातन संस्कृति का मूल

“सोने की चिड़िया”, यह शब्द हम सभी ने बचपन से कई बार सुना है। धरती पर भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। एक समय था जब आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भारत विश्व में प्रथम स्थान पर था। विदेशी यात्री भारत की समृद्धि, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से आकर्षित होकर यहां

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वृद्धावस्था का टॉनिक

वृद्धावस्था का टॉनिक, जो जीवन को जीने का विश्वास देता है, वह परम आवश्यक है। वृद्धावस्था में जब समाज धीरे-धीरे साथ छोड़ने लगता है, तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे सभी अपने-अपने तरीके से पिंड छुड़ाने लगे हों। यद्यपि अनेक लोग दिलासा देने का कार्य करते हैं, कुछ उनमें से विश्वास जगाने का भी प्रयास

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मानवता

मानवता, एक ऐसा शब्द जो सुनते ही मन में करुणा, सहानुभूति, प्रेम और समझ का भाव जगाता है। किंतु प्रश्न यह उठता है कि क्या वास्तव में मानवता वही है, जो हम आज समझते हैं? या यह एक सतत प्रक्रिया है-एक ऐसी सीख, जो मानव को निरंतर अर्जित करनी पड़ती है? धरती के इतिहास की

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भक्त का तकलीफ

परमेश्वर एक माँ की तरह हैं। जिस प्रकार माँ अपने बच्चे से प्रेम करती है और उसके बदले में कुछ नहीं चाहती, उसी प्रकार परमेश्वर भी अपने भक्तों से निस्वार्थ प्रेम करते हैं। यद्यपि परमेश्वर सबके प्रति समान व्यवहार करते हैं, परंतु जो उनका अनन्य भक्त होता है, परमेश्वर उसके साथ माँ की तरह स्नेहपूर्ण

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